कानपुर। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) की गुरुवार को हुई वार्षिक आम सभा (एनुअल जनरल मीटिंग) में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कंपनी के लेखों (अकाउंट्स) को औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की गई। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में कंपनी के लेखों पर कोई टिप्पणी नहीं की। मेट्रो अधिकारी इसे एक असाधारण तथ्य और कंपनी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बता रहे हैं। दावा है कि यह उपलब्धि यूपीएमआरसी की पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुदृढ़ लेखा व्यवस्था का प्रमाण है।
इस उपलब्धि पर यूपीएमआरसी के निदेशक (वित्त) एसके मित्तल ने कहा, सीएजी की शून्य टिप्पणी हमारी वित्तीय ईमानदारी और आंतरिक नियंत्रण तंत्र की मजबूती को दर्शाती है। यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार के अनुसार आई-मेट्रो द्वारा जारी की परफॉर्मेंस इंडेक्स (केपीआई) के आंकड़ों में यूपीएमआरसी ने टियर-2 शहरों की अन्य मेट्रो प्रणालियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रति किलोमीटर गैर-किराया राजस्व अनुपात अन्य मेट्रो प्रणालियों की तुलना में 95 प्रतिशत अधिक है जबकि प्रति यात्री किराया राजस्व अनुपात 30 प्रतिशत ज्यादा है।
इसी प्रकार प्रति किलोमीटर आय 29 प्रतिशत अधिक है और प्रति किलोमीटर खर्च अन्य मेट्रो प्रणालियों की तुलना में नौ प्रतिशत कम है। प्रति किलोमीटर यात्रियों की संख्या आठ प्रतिशत अधिक है। यूपीएमआरसी के अंतर्गत लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। कानपुर और आगरा मेट्रो परियोजनाओं के बैलेंस सेक्शन में कार्य प्रगति पर है।