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बिटिया का बुलंद हौसला और बिजनेस चल पड़ा

Sun, 18 Sep 2016 07:37 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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कुछ अलग करने का जुनून ही आपको भीड़ से अलग करता है। ऐसा ही करके दिखाया है शहर की बेटी कृति रस्तोगी ने। बीटेक के बाद कृति ने सॉफ्टवेयर की मल्टीनेशनल कंपनी इंफोसिस में जॉब की लेकिन मन नहीं लगा। इरादा मजबूत किया और सालाना चार लाख रुपये पैकेज की जॉब छोड़ दी। उद्यमिता को अपनाया और जिम व पार्लर खोलकर अच्छा मुकाम हासिल किया। कभी नौकरी करने वाली कृति ने 27 लोगों को नौकरी दे रखी है। कर्मचारियों को वेतन देने और कुल खर्च निकालने के बाद सालाना 5.50 लाख रुपये की बचत भी कर लेती हैं।
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वर्ष 2013 मेें बतौर सिस्टम इंजीनियर इंफोसिस ज्वाइन करने वाली कृति पढ़ाई में अव्वल रही हैं। सभी कक्षा में फर्स्ट डिवीजन हासिल की। इंफोसिस में जॉब के दौरान कृति ने आल इंडिया रेडियो हैदराबाद का ऑडिशन दिया और सेलेक्शन भी हो गया। पसंदीदा सब्जेक्ट साइंस है, फिर भी लीक से हटकर काम करना पसंद किया। आल इंडिया रेडियो का जॉब ऑफर ठुकरा दिया।

तिलक नगर (होटल विजय विला के ठीक सामने) में वर्ष 2015 में इनशेप नाम से जिम और मिरेकल नाम से पार्लर खोला। महिला और पुरुषों को कस्टमर बनाया। आकर्षक पैकेज देकर मार्केट मेें पैठ बनाई। इसी का नतीजा रहा कि 300 स्थायी कस्टमर बन गए। शादी के सीजन में कस्टमर बढ़ जाते हैं। जिम भी एडवांस है। एरोबिक्स, जुंबा और वेट लॉस का विशेष पैकेज दिया जाता है। डाइट काउंसलिंग भी की जाती है। पार्लर में दुल्हन का भी मेकअप किया जाता है। बॉडी मसाज भी होती है।
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कस्टमर रिलेशन का बिजनेस टफ

डेमो पिक
चुनौती
कस्टमर केयर और कस्टमर रिलेशन का बिजनेस टफ होता है। जो क्लाइंट आते हैं, उनकी समस्या, शिकायत सुनना और उसका समाधान धैर्य पूर्वक करना होता है। कस्टमर और कर्मचारी के बीच समन्वय बना रहे, यह भी देखना पड़ता है। तभी बिजनेस को आगे बढ़ाया जा सकता है। 

ज्वैलरी बनाने का शौक
कृति को पेपर क्वीलिंग ज्वैलरी बनाने का शौक भी है। वह इसकी प्रदर्शनी लगाती हैं। साथ ही कहती हैं कि मेहनत और आइडिया से ही पैसे आते हैं। ज्वैलरी बनाने की कला इसी का एक हिस्सा है। पेपर क्वीलिंग ज्वैलरी महंगी आती है। 

 
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बिटिया की सफलता का सूत्र

डेमो पिक
सफलता का सूत्र
- कृति बताती है कि वह इंफोसिस में निचली पोस्ट पर थी। सबका सुनना और काम करना अच्छा लगता था। अब अपना बिजनेस है। सबसे ऊंची पोस्ट पर हूं। सबसे काम लेना होता है। यह अलग तरह का अनुभव है, जिसका खूब आनंद ले रही हूं। 

इकलौती बेटी ने फैमिली बिजनेस छोड़ा
कृति के पिता आनंद मोहन रस्तोगी केमिकल के बड़े बिजनेसमैन हैं। इकलौती बेटी होने के बावजूद कृति फैमिली बिजनेस से नहीं जुड़ीं। अलग बिजनेस करके मुकाम हासिल किया। कृति का कहना है कि बच्चोें को मां-बाप के नाम से जाना जाए, यह अच्छी बात है। अगर किसी के बच्चे के नाम से माता-पिता को जाना जाए तो और अच्छी बात है। 

पर्सनल प्रोफाइल 
नाम- कृति रस्तोगी
जन्मतिथि 25 सितंबर 1990
हाईस्कूल- 90 फीसदी
इंटरमीडिएट- 95 फीसदी
स्कूल- सेंट मैरी कान्वेंट स्कूल कैंट
बीटेक- 75 फीसदी इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन (पीएसआईटी)
पसंद- घूमना और खाना। फिल्म देखना भी अच्छा लगता है।  
परिवार- पिता आनंद मोहन रस्तोगी (बिजनेसमैन) और मां पूनम रस्तोगी (हाउस वाइफ)
प्रेरणा स्रोत- मधु धूपर और गुलशन कुमार धूपर (ताई, ताऊ,)।
 
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