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Kanpur News: फसल अवशेष जलाने से कमजोर होती खेत की उर्वरा शक्ति

Sat, 07 Mar 2026 01:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। झींझक ब्लॉक के मुंडेरा गांव में शुक्रवार को एक दिवसीय फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कृषि वैज्ञानिकों ने खेत पर जाकर फसल अवशेष जलाने के नुकसान बताए।
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कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर की ओर से यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि फसल के अवशेष को खेत में जलाने से मृदा में नमी कम हो जाती है। मृदा तापमान बढ़ जाता है। इससे खेत में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं। इससे उर्वरा शक्ति कमजोर होती है। बाद में उत्पादन पर इसका असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन की जरूरत है। हैप्पी सीडर/सुपर सीडर से बुआई कराई जा सकती है। इसमें फसल अवशेष मिट्टी में मिला दिए जाते हैं। सुपर सीडर से बोई गई फसल देखी गई। उन्होंने कहा कि डीकंपोजर का प्रयोग कर फसल अवशेष से खाद बनाई जा सकती है। वहीं फसल अवशेष से मशरूम का गुणवत्तायुक्त उत्पादन किया जा सकता है। फसलों के अवशेषों का खेती में मल्चिंग के रूप में उपयोग होता है।
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