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पनकी में मिला बुंदेलखंड ग्रेनाइट

Wed, 24 Feb 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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पनकी क्षेत्र में 503 मीटर की गहराई पर पानी नहीं है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिसर्च से पता चला है कि 503 मीटर की गहराई पर बुंदेलखंड ग्रेनाइट के पत्थर मिले हैं। ये पत्थर हमीरपुर में 125-140 मीटर की गहराई पर पाए जाते हैं।
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इसके अलावा ग्रेनाइट के नीचे पानी के अंश नहीं मिले हैं। यह रिसर्च 503 मीटर की गहराई पर ट्यूबवेल लगाकर और उससे मिले तत्व के अध्ययन से हुई है। बोर्ड ने क्षेत्र में जल संकट गहराने की आशंका जताई है। साफ कहा है कि भूजल तेजी से नीचे जा रहा है, इसे रिचार्ज करने की जरूरत है। इसका सबसे अच्छा तरीका वर्षा जल संचयन है।

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने मंगलवार को दो दिवसीय (23, 24 फरवरी) कार्यशाला का आयोजन किया। उद्घाटन चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार प्रो. धूम सिंह ने किया। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री कृषक भवन सभागार में जल प्रबंधन एवं स्थानीय भूजल सहभागिता में चर्चा की गई।
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बोर्ड के विज्ञानी प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कानपुर नगर में पानी का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। जो ट्यूबेल पहले 100-150 मीटर की गहराई पर लगते थे, वह अब 250 से 400 मीटर की गहराई पर लगाए जा रहे हैं।

इसकी रिपोर्ट जल निगम, संस्थान और रक्षा मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। विज्ञानी ने कहा कि ग्राउंड वाटर पर रिसर्च के लिए ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने कानपुर नगर में 15 ट्यूबवेल लगवाए हैं। सबकी डेप्थ (गहराई) 250-400 मीटर है। एक ट्यूबेल कृषि विश्वविद्यालय कैंपस में भी लगा है।

पनकी क्षेत्र में लगे ट्यूबेल से  बुंदेलखंड ग्रेनाइट की रिपोर्ट मिली है। अन्य क्षेत्रों में भी पानी के डेप्थ का आकलन किया जा रहा है। डॉ. आरए सिंह ने कहा कि अब सिंचाई का तरीका बदलना होगा। इस पर ज्यादा पानी नष्ट हो रहा है।

ड्रिप एरिगेशन बेहतर विकल्प हो सकता है। इस मौके पर इको फ्रेंडस के राकेश जायसवाल, डॉ. पीके राठी, संजीव मेहरोत्रा, डॉ. राम प्रकाश, जगदंबा प्रसाद, राम आसरे सिंह और एसपी दुबे मौजूद रहे।

शहर में पानी की तीन लेयर
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के विज्ञानी एबी सिंह ने कहा कि शहर में पृथ्वी के नीचे पानी की तीन लेयर (सतह) मिले हैं। 100 से 150 मीटर की गहराई पर भूजल दोहन का असर दिख रहा। इस गहराई पर ट्यूबवेल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। 150 से 250 मीटर की गहराई पर पानी खारा है। इसका इस्तेमाल पीने में नहीं किया जा सकता है।
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250 से 400 मीटर की गहराई पर पानी अच्छा है। ट्यूबवेल भी काम  कर रहे हैं। अब इसी मानक के हिसाब से ही कानपुर नगर में ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं।
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