कानपुर। कानपुर में हिजाब या बुरका पहनकर आने वाले ग्राहकों को सोना-चांदी का सामान न दिखाने की घोषणा पर व्यापारी संगठन दो फाड़ हो गए हैं। उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन ने ऐसी किसी भी घोषणा को गलत प्रचार बताते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। दोनों प्रमुख संगठनों ने कहा कि यह निर्णय कुछ क्षेत्रीय संगठनों की ओर से बिहार और बनारस की देखादेखी लिया था, जिसका उनके संगठनों से कोई लेना-देना नहीं है।
उत्तर प्रदेश सराफा एसोसिएशन के मंत्री रामकिशोर मिश्रा के अनुसार, सरकार या किसी बड़े व्यापारिक संगठन की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सोना-चांदी के भावों में आई तेजी के चलते पहले से ही कारोबार काफी कम है, ऐसे में ग्राहकों को सामान न दिखाने की बात समझ से परे है। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने भी पुष्टि की कि कानपुर में इस संबंध में कोई पत्र जारी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि चार दिन पूर्व पुलिस कमिश्नर से इस विषय पर चर्चा हुई थी जिन्होंने कानून व्यवस्था को बेहतर बताया था।
शास्त्रीनगर स्थित एक गेस्ट हाउस में रविवार को सराफा कारोबारियों और स्वर्णकार समाज की बैठक हुई थी। जिसमें अध्यक्ष पुष्पेंद्र जायसवाल ने बताया कि बनारस से आए हुए अविनाश सेठ, राहुल सेठ, विकास सेठ, कैलाश सेठ और अमरनाथ सेठ और उनकी टीम ने बताया था कि बनारस में हिजाब, बुरका, हेलमेट पहनकर, मास्क लगाकर आने वाले व्यक्तियों को सोना चांदी का सामान नहीं दिखाएंगे। पहले उनका आईडी प्रूफ लेंगे। उसका सत्यापन कराएंगे। उसके बाद ही लेन-देन किया जाएगा। पूरे भारतवर्ष में सोने, चांदी की बढ़ी हुई कीमतों के कारण छोटे-बड़े दुकानदारों के साथ चोरी, टप्पेबाजी, लूटपाट घटनाएं हो रही हैं। इसके देखते हुए यह निर्णय लिया गया था।