जाजमऊ में ढही निर्माणाधीन इमारत जर्जर मानकर मजदूर भी डरे थे लेकिन कुछ कहने पर ठेकेदार गाली देकर भगा देता था इसलिए रोजी-रोटी के आगे मजबूर थे।
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जाजमऊ में धराशायी हुई छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
हैलट और कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती मजदूरों ने बताया कि ठेकेदार से कई बार इमारत कमजोर होने की शिकायत की थी। हैलट में भर्ती रायपुर (छत्तीसगढ़) के मजदूर पंचराम यादव ने बताया कि बिल्डिंग पतले-पतले पिलरों पर खड़ी की गई थी। पेट का सवाल था इसलिए जान जोखिम में डालकर काम करते थे।
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12 पतले पिलरों पर तानी जा रही थी इमारत
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ढही इमारत का मलबा हटाते हुए
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
रायपुर निवासी ढलाई मजदूर धर्म सिंह यादव ने बताया कि मात्र 12 पतले पिलरों पर इमारत तानी जा रही थी। सरसौल निवासी विवेक ने बताया कि कि वह दो महीने पहले जब वह मजदूरी करने पहुंचा था तब एक मंजिल इमारत थी।
स्लैब सूखे बिना तेजी से हो रहा था काम, दो महीने में पांच स्लैब डलवाई गईं
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मलबे में दबे लोगों को निकालती एनडीआरएफ की टीम
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
ठेकेदार स्लैब सूखे बिना तेजी से काम करवाता रहा। दो महीने में पांच स्लैब डलवाई गईं। पिलर सात गुणा आठ इंच चौड़े थे। श्रावस्ती के गयादीन ने बताया कि वह गांव के साथी विनोद, सिलेराम, पवन कुमार के साथ मजदूरी करने गया था। फिलहाल विनोद का पता नहीं चला है। जाजमऊ हादसे के आठ घायल हैलट में आए थे।
स्लैब काटकर मलबे के नीचे से लोगों को निकालने में लगी एनडीआरएफ टीम
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
ईएमओ हैलट के डॉ. सुबोध ने बताया सात भर्ती मरीजों में दो की हालत चिंताजनक है, जबकि एक की छुट्टी कर गई। शाम को एक अज्ञात युवक का शव लाया गया।
कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. एसके पांडेय ने बताया जाजमऊ हादसे के 20 घायल आए थे। इनमें से दो की मौत हो गई थी। 10 को हैलट रिफर किया, पांच भर्ती हैं। सुबह लाई गई बच्ची स्वस्थ थी, उसे घर भेजा गया।