इमारत ढहने के बाद मृतक के राेते-बिलखते परिजन बिल्डिंग के मालिक महताब अालम (साइकिल सवार)
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
कानपुर के जाजमऊ इलाके में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष महताब अालम कि जिस बिल्डिंग ने सात लाेगाें की जान ले ली वह अवैध थी। महताब अालम ने सत्ता की हनक में महज छह माह के अंदर छह मंजिला इमारत तैयार करवा ली थी अाैर सातवें की स्लेप पड़ रही थी। घटना के बाद कई चाैंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसने न केवल जिला प्रशासन अाैर कानपुर डेवलपमेंट बाेर्ड काे कटघरे में खड़ा किया बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज पर भी सावलिया निशान लगा दिया।
महताब की निर्माणाधीन इमारत गिरने के बाद ये चाैंकाने वाले त्थ्य सामने अाए हैं -
- महताब ने चुनाव से पहले ही पूरा काम कराने के लिए महज छह माह के अंदर छह मंजिल की इमारत तैयार करवा ली थी। सातवें मंजिल पर स्लेप पड़ने के दाैरान यह हादसा हाे गया।
- जितनी जमीन पर यह सात मंजिला इमारत तैयार किया जा रहा था उसपर कानूनी ताैर पर केवल तीन मंजिल की इमारत ही बनाई जा सकती है।
- निर्माण कार्य के लिए महताब अालम ने नक्शा भी कानपुर डेवलपमेंट बाेर्ड से पास नहीं कराया था।
- स्थानीय लाेगाें का यह भी कहना है कि केडीए इस बिल्डिंग काे खुद जल्द से जल्द बनवाना चाहती थी। इसके लिए केडीए ने माेटी रकम भी वसूली थी।
- नियमाें की अनदेखी कर अवैध निर्माण करना आसान है बल्कि इसे हटवाना टेढ़ी खीर मानी जाती है।