केंद्रीय बजट में शहरों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने और आधुनिक बनाने के लिए अर्बन चैलेंज फंड का एलान किया गया है। इस योजना के तहत एक लाख करोड़ रुपये तक की राशि शहरी विकास परियोजनाओं में लगाई जाएगी। इस फंड के माध्यम से देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल कानपुर की आबोहवा भी बेहतर होने की उम्मीद है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय के अनुसार पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि शहरी क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन वाले माध्यमों पर रोक लग सके। इसके लिए पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह सौर ऊर्जा से संचालित वाहनों का प्रयोग बेहतर उपाय होगा। अर्बन चैलेंज फंड के माध्यम से शहरों को स्मार्ट बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। कोयले से चलने वाले उद्योगों, बिजली वाले प्लांट को सौर ऊर्जा में बदलकर वहां के वातावरण को प्रदूषणमुक्त करने में भी सहायता मिलेगी। यह शहरों का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
डॉ. पांडेय के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करेगा। इसके तहत कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कमी करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कोयला, पेट्रोल और डीजल के माध्यम से जो भी कार्बन उत्सर्जन होता हैं, उसमें ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता रहती है। इसमें कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, हाइड्रो फ्लोरो कार्बन जैसी गैस शामिल हैं।