कोरोना के बाद फेफड़ों में फाइब्रोसिस हुई थी
इसी तरह लखनपुर के देवेंद्र (52) को सांस में दिक्कत थी। कोरोना के बाद उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस हुई थी। इलाज चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर चल रहा था। उनके छोटे भाई रामेंद्र ने बताया कि सुबह तेज-तेज सांस लेने के बाद बेहोश गए। अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हुई है।
पुराने रोगियों को जटिलताएं उभर आ रही हैं
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि सांस फूलने, ब्रेन हेमरेज, दमा और अस्थमा अटैक के रोगियों को भर्ती किया गया है। प्रदूषण और वायरल संक्रमण से पुराने रोगियों को जटिलताएं उभर आ रही हैं। रोगियों की हालत बिगड़ जा रही है।
हेमोग्लोबिन से चिपक कर शरीर में नहीं जा पाती
प्रदूषण, धुंध होने पर नाइट्रिक आक्साइड शरीर में पहुंचता है जिससे आक्सीजन हेमोग्लोबिन से चिपक कर शरीर में नहीं जा पाती। आक्सीजन की कमी होती है और फूलने लगती है। इसके अलावा प्रदूषण के 2.5 माइक्रोग्राम से अति सूक्ष्म कण सीधे ब्लड में चले जाते हैं, जिससे नसों में सिकुड़न आती है।