कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में बताया गया कि ब्रेन स्ट्रोक साइलेंट किलर है। अगर इसके लक्षण शुरू में ही पहचान लिए जाएं तो कारगर इलाज मिल जाता है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने और धूम्रपान, शराब से दूरी बनाने पर रोग से बचाव होता है।
कार्यक्रम का आयोजन शनिवार रात परेड स्थित आईएमए भवन में किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नसों में थक्का जमने से होता है। इसमें नस फट सकती हैं। ऑक्सीजन न पहुंचने पर कोशिकाएं मरने लगती हैं। स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक होते उभरते हैं। इनमें चेहरे का एक तरफ झुक जाना, एक हाथ या पैर सुन्न पड़ना, बोलने में दिक्कत, चक्कर संतुलन में कमी, आंखों की दृष्टि अचानक धुंधली होना आदि हैं। यह लक्षण उभरने पर बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
गोल्डन ऑवर साढ़े चार घंटे का होता है। इसमें दवाओं से थक्का घुल जाता और खून का बहाव बहाल हो जाता है। इस मौके पर डॉ. एके ठक्कर, डॉ. रवि शंकर, डॉ. रोहित अग्रवाल आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में आईएमए अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी, सचिव डॉ. विकास मिश्रा, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह आदि रहे।