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बंदी गृह में अश्लील हरकतों से परेशान किशोर ने खाया जहर, पुलिस के हाथ-पांव फूले

Wed, 16 Jan 2019 08:01 AM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार



 
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बाल संरक्षण गृह चित्रकूट में हुए जानलेवा हमले के मामले में बाल संरक्षण गृह में निरुद्ध किशोर बंदी ने पेशी के दौरान प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्यायालय महोबा परिसर में जहर खा लिया। पुलिस अभिरक्षा में बंदी के जहर खाने के बाद एसआई व सिपाहियों के हाथ पैर फूल गए। हालत बिगड़ने पर किशोर को गंभीर हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। बंदी ने बाल संरक्षण गृह में निरुद्ध अन्य बंदियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया।

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कोतवाली चरखारी के मोहल्ला शेखन फाटक निवासी नितेंद्र (15) पुत्र रमेश कुशवाहा पर कस्बे के ही एक युवक को बंधक बनाकर जान से मारने की कोशिश का आरोप था। नितेंद्र के खिलाफ कोतवाली चरखारी में मुकदमा दर्ज कर तीन माह पहले उप कारागार महोबा भेजा गया था। जहां से नितेंद्र को बाल संरक्षण गृह चित्रकूट भेज दिया गया। मंगलवार को पुलिस लाइन के एसआई संतोष कुमार पटेल व तीन सिपाही किशोर को पेशी पर प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्यायालय महोबा लाए। पेशी से निकलते ही किशोर ने पैंट की जेब से कागज के पुड़िया में रखा जहर खा लिया।

 

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अभिरक्षा में चल रहे एसआई व सिपाहियों ने झपट्टा मारकर मुंह से जहर का कुछ हिस्सा बाहर निकाल लिया जबकि कुछ हिस्सा बंदी खा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। हालत बिगड़ने के बाद आनन-फानन में किशोर बंदी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसका उपचार चल रहा है। अस्पताल में भर्ती बंदी नितेंद्र ने बताया कि बाल संरक्षण गृह में निरुद्ध अन्य बंदियों द्वारा उसके साथ मारपीट व अश्लील हरकतें की जा रही है और जबरन सुसाइड नोट भी लिखवाया गया है, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान है। उसने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया। मामले की जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को दी गई है। डॉक्टरों ने बंदी की हालत में सुधार बताया है।

बाल संरक्षण गृह कर्वी में निरुद्ध बंदी दो माह से जहर की पुड़िया अपने साथ लिए था। इसका खुलासा किशोर ने स्वयं किया। बताया कि जब उसे महोबा जेल से बाल संरक्षण गृह भेजा गया तब चंद्रभान नामक बंदी ने उसे जहर की पुड़िया दी थी। जिसे वह अपने पास रखे रहा। बाल संरक्षण गृह में निरुद्ध अन्य बंदियों द्वारा उसे प्रताड़ित किए जाने पर उसने जान देने की कोशिश की। इससे उप कारागार व बाल संरक्षण गृह की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है।
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