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विद्यालयों और पुस्तक विक्रेताओं की सांठगांठ से महंगी बिक रहीं किताबें : डीएम

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जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में शामिल जिलाधिकारी।  - फोटो : सूचना विभाग
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कानपुर। महंगी बिक रही किताब-कॉपियों के मामले में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को विद्यालयों के साथ पुस्तक विक्रेता को अवैध वसूली पर रोक लगाने के लिए कहा।
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कलेक्ट्रेट में हुई जनपदीय शुल्क नियामक समिति की बैठक में उन्होंने दोनों की सांठगांठ से महंगी किताबें बेचे जाने को भ्रष्टाचार बताते हुए इसकी तुलना संचारी रोगों से की। कहा कि पुस्तक विक्रेता वेक्टर जनित रोग के वाहकों की भांति स्कूल या प्रबंधक के लिए अभिभावकों से अवैध वसूली न करें।

उन्होंने डीआईओएस को निर्देश दिया कि विद्यालयों से शुल्क निर्धारण या पाठ्यक्रम की जानकारी 31 दिसंबर तक स्कूलों की वेबसाइट पर अवश्य अपलोड करा दें। बैठक में शहर के कई पुस्तक विक्रेताओं ने हिस्सा लिया। इसमें विभिन्न माध्यमों से मिली सूचनाओं के विषय में पुस्तक विक्रेताओं से सुझाव लिए गए। विक्रेताओं ने कहा कि उनको स्कूलों से देरी से पुस्तकों की लिस्ट मिलती है।
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इस दौरान जिलाधिकारी ने पुस्तक विक्रेताओं से कई सवाल भी किए। उन्होंने पूछा कि दुकान में जिन पुस्तकों का विक्रय किया जाता है, उसकी सूचना किस माध्यम से आपको प्राप्त होती है। विद्यालय की ओर से चयनित प्रकाशकों की सूची आपको किस के माध्यम से मिलती है।

क्या कॉपी-किताबों के विक्रय में अभिभावकों को छूट दी जाती है। यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि किन-किन पुस्तकों का अपनी दुकान पर स्टॉक रखना है। डीएम के इन सवालों के आगे बुक सेलर्स को जवाब देते नहीं बना। किसी ने कहा कि प्रकाशकों से ही सूचना मिलती है तो किसी ने कहा कि कुछ स्कूल ही किताबों की सूची देते हैं। हालांकि डीएम उनके जवाबों से संतुष्ट नजर नहीं आए।

उन्होंने सभी पुस्तक विक्रेताओं से कहा कि किसी संस्थान या स्कूल के लिए अवैध धनराशि का वाहक न बने, जिससे प्रतिष्ठा खराब हो। यदि किसी पुस्तक विक्रेता की ओर से प्रकाशक या स्कूल को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का मामला पाया जाता है तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि वर्तमान सत्र 2025-26 में जितनी पुस्तकें विक्रय की गई हैं, उनके बिल बाउचर एवं पुस्तकों पर जो छूट दी गई उसके साक्ष्य उपलब्ध कराएं।
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