फतेहपुर जिले में किशनपुर थाने के यमुना घाट पर शनिवार को नाव पलटने में डूबे एसआई रामजीत, कांस्टेबल शशिकांत व नाविक रवि के शव रविवार सुबह एनडीआरएफ टीम ने बारी-बारी से बाहर निकाले।
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दरोगा समेत तीनों के शव एनडीआरएफ टीम ने बाहर निकाले
- फोटो : अमर उजाला
घटना की सूचना पर एसआई और कांस्टेबल के परिवारीजन भी पहुंच गए हैं। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं। पुलिस और पीएसी की टीमों ने शनिवार देर रात तक शव ढूंढने का पूरा प्रयास किया था। लेकिन नहीं मिल पाए थे।
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फतेहपुर में दर्दनाक हादसा
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जिस पर एसपी प्रशांत वर्मा ने बनारस से एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर रविवार सुबह 4 बजे से सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। यमुना से 8:35 बजे पहला शव नाविक का निकाला गया। दूसरा शव 9:08 बजे एसआई रामजीत और तीसरा कांस्टेबल शशिकांत का शव 9:18 बजे मिला। एनडीआरएफ टीम वाराणसी व बांदा ने मिलकर तीनों के शव यमुना से निकाले हैं। बताया जा रहा है कि तीनों के शव नाव के नीचे दबे हुए थे।
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फतेहपुर में दर्दनाक हादसा
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बताते चलें कि शनिवार को किशनपुर थाने में तैनात दरोगा रामजीत सोनकर (52), सिपाही शशिकांत (25) व सिपाही निर्मल यादव लॉकडाउन में शाम करीब साढ़े चार बजे गश्त पर रवाना हुए थे।
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फतेहपुर में दर्दनाक हादसा
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यमुना किनारे के लोहंगपुर घाट से नाविक रवि (27) को बुलाया गया। सभी लोग नाव से बांदा सीमा तक जाकर लौट रहे थे। यमुना नदी की सीमा पर लखनपुर जोरावरपुर गांव के पास शाम करीब साढ़े छह बजे तेज हवा चलने से नाव पलट गई। सिपाही निर्मल करीब चार सौ मीटर जैसे-तैसे तैरकर लोहंगपुर घाट पर पहुंचा। वह थोड़ी देर के लिए अचेत हो गया।
दरोगा समेत तीनों के शव एनडीआरएफ टीम ने बाहर निकाले
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हादसा देखकर आसपास मौजूद नाविक और ग्रामीण दूसरी नाव से नदी में तलाश शुरू की। एसओ आरके यादव ने नदी में जाल डालकर खोजबीन शुरू कराई। सिपाही शशिकांत गाजीपुर जिले के कासमाबाद थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। दरोगा रामजीत सोनकर मूल रूप से जौनपुर जिले के थे।