दरअसल, रघुराज कभी सपा के मजबूत नेता थे। मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव से इनकी नजदीकियां जगजाहिर हैं। मुलायम और शिवपाल को रघुराज गुरु मानते हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि सबसे ज्यादा धर्म संकट शिवपाल के सामने है। परिवार के लोगों के कहने पर वह डिंपल का समर्थन भले करें लेकिन रघुराज का विरोध नहीं करेंगे।
कुल मिलाकर शिवपाल फैक्टर इस चुनाव में बड़ी भूमिका अदा करेगा। मैनपुरी के साथ ही इटावा की जसवंतनगर सीट पर शिवपाल का प्रभाव भी है। जसवंतनगर सीट से शिवपाल 1996 से लगातार विधायक हैं। यहां 3.85 लाख मतदाता हैं। रघुराज भी प्रत्याशी घोषित होते ही मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह के नाम को आगे करने लगे हैं और सपा पर हमलावर हैं।
राजनीतिक सफर पर नजर
रघुराज 1999 और 2004 में सपा के टिकट से लगातार दो बार इटावा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2012 में उन्होंने सपा के टिकट पर सदर सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। शिवपाल के करीबी होने के कारण 2017 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस पर 27 जनवरी 2017 को उन्होंने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया और सात फरवरी 2022 को भाजपा में शामिल हो गए।
विरासत संपत्ति में होती, राजनीति में नहीं: रघुराज
मैनपुरी में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी घोषित होते ही पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य ने अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है। कहा कि विरासत संपत्ति में होती है, राजनीति में नहीं। परिवारवाद केवल सैफई में है। डिंपल यादव से नेता, विधायक और सांसद तक नहीं मिल पाते, कार्यकर्ता क्या मिल पाएंगे।
मंगलवार को फ्रेंड्स कालोनी स्थित आवास पर वार्ता में उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव यदि मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं तो वह भी मुलायम सिंह यादव के शिष्य हैं। शिष्य के नाते उनका भी उतना अधिकार है। देश की जनता सही फैसला देती है। मैनपुरी की जनता चाहती है कि उनके बीच का प्रतिनिधि हो। रात 12 बजे भी कोई उनका दरवाजा खटखटाएगा तो वह मैनपुरी के एक-एक गांव में जाएंगे।
शाक्य ने कहा मुलायम सिंह बहुत बड़े नेता थे। उन्होंने हम जैसे न जाने कितने पौधे लगाए, लेकिन अखिलेश ने उन्हें काटने का काम किया। शिवपाल सिंह का सहयोग मिलने के सवाल पर कहा कि हर गुरु चाहता है कि उसका शिष्य आगे बढ़े, उसे खुशी मिलती है। मैनपुरी की लड़ाई कोई बड़ी नहीं है। वह लगातार दो बार इटावा से लोकसभा चुनाव जीते। इतिहास हम नहीं मैनपुरी की जनता बनाएगी। किसान के बेटे हैं और गांव से निकलकर आए हैं।