भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड प्रांत के 20 लाख दलितों पर डोरे डालने की मुहिम शुरू करेगी। एक महीना पहले लखनऊ में बनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने का काम अगले हफ्ते प्रांत के किसी एक जिले से शुरू होगा।
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प्रदेश के इस दलित बहुल क्षेत्र में पैठ बनाने के लिए भाजपा बजट में गई घोषणाओं का सहारा लेगी। बजट में गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान और दलितों के लिए 56 हजार करोड़ रुपये के फंड की घोषणा को भाजपा भुनाएगी। इस काम के लिए कानपुर-बुंदेलखंड प्रांत में भाजपा के वालंटियरों की तैनाती शुरू हो गई है।
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भाजपा का मानना है कि दलित ही एकलौता ऐसा वोट बैंक है जो किसी भी चुनाव में सर्वाधिक 80 से 90 फीसदी तक वोट डालता है। जिस चुनाव में दलितों का झुकाव किसी खास पार्टी के पक्ष में हो जाता है, उसे हराना दूसरों के लिए नामुमकिन हो जाता है।
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इसी सोच की वजह से भाजपा ने दलितों के दिल में उतरने की रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। राजनीति के माहिर बताते हैं कि लोकसभा-2019 की तैयारियों के चलते ही गुरुवार को पेश हुए बजट में सरकार ने दलितों के लिए 56 हजार करोड़ रुपये के फंड का इंतजाम किया है।
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इस फंड से दलितों के लिए करीब 280 प्रकार की योजनाएं शुरू होंगी। यूं तो लोकसभा चुनाव की तैयारी पूरे देश में एक साथ हो रही है लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान उत्तर प्रदेश पर है। यहां भी कानपुर-बुंदेलखंड प्रांत भाजपा के टॉप एजेंडे में शामिल है। इस प्रांत में लोकसभा की 10 सीटें आती हैं।
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पार्टी के सूत्र बताते हैं कि इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पार्टी को 20 लाख दलित वोटरों को साधना बहुत जरूरी है। पिछले चुनाव में भाजपा कन्नौज को छोड़कर सभी नौ सीटें जीती जरूर थी, लेकिन कुछ सीटें ऐसी थीं, जहां पर गिरते पड़ते जीत हासिल हुई थी। बताते हैं कि वे सभी सीटें दलित बहुल थीं।
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इन सीटों के अलावा कानपुर बुंदेलखंड प्रांत की सभी 10 सीटों के 20 लाख दलितों के लिए भाजपा ने इस बार खास प्लान तैयार किया है। दलितों के बीच के ही कद्दावर नेता उन्हें भाजपा की नीतियों और दलित हितैषी कामों का प्रचार प्रसार करेंगे।
अपने बीच के लोगों को समझाएंगे कि बसपा में अब उनका कोई भविष्य नहीं है। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू करने के पीछे दलितों और गरीबों और की भलाई की मंशा को उनके बीच जाहिर किया जाएगा।