यूपी की तीन महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टियां (भाजपा, बसपा और सपा) वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या फिर आपत्ति दर्ज कराने में रुचि नहीं ले रही हैं। इससे निर्वाचन आयोग निराश है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित मीटिंगों से नेता नदारद रहते हैं। इस कारण बूथ स्तर से वोटर बनाने का अभियान रफ्तार नहीं पकड़ सका।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, नाम कटवाने और त्रुटि दूर कराने का अभियान 31 अक्तूबर तक चलेगा। जिला निर्वाचन दफ्तर ने जो प्रयास किए, उसकी वजह से 45 हजार आवेदन फार्म (फार्म-6) जमा हुए हैं। इसमें युवा मतदाताओं की संख्या बेहद कम है। आयोग के मुताबिक 10 विधानसभा क्षेत्रों में एक लाख युवाओं को वोटर बनाने का स्कोप है। राजनीतिक पार्टियों का संगठन बूथ और वार्ड स्तर तक होता है। इसलिए पार्टियों से कहा गया था कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, नाम कटवाने और त्रुटि दूर कराने में सहयोग करें लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा, सपा और बसपा का रुख बेहद निराशा जनक है। मतदाता सूची से संबंधित जितनी मीटिंग बुलाई गई, उससे इन पार्टियों के नेताओं ने किनारा कर लिया। ऐसा लग रहा कि सूची अपडेट कराने की जिम्मेदारी संभावित प्रत्याशियों पर छोड़ दी गई है। मीटिंग में कांग्रेस, रालोद और सीपीआई के नेता आते हैं लेकिन उनका प्रभाव कम दिख रहा। इसी वजह से अभियान को गति नहीं मिल सकी। अब कुछ दिन बचे हैं। इसी में त्योहार भी हैं। 27 अक्तूबर तक नाम जोड़ने का विशेष अभियान चलेगा।