भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
भाजपा ने दलित वोटों के लिए बस्तियों का नया एजेंडा तैयार किया है। पार्टी ने साफ किया है कि सपा से उसकी लड़ाई सड़क पर है तो बसपा से उसकी सीधी टक्कर गलियों और गांवों में रहने वाले दलित मतदाताओं के लिए होगी। दलित वोट को इस बार अपनी तरफ खींचने के लिए पार्टी ने धर्म, समाज, रीति रिवाज, त्योहार सभी हथकंडे अपनाने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि दलितों को जोड़ने के लिए उनके बीच की हर परंपरा में ढलकर कार्यकर्ताओं की टीम काम करेगी। इस काम में संघ के स्वयं सेवकों का भी सहयोग लिया जाएगा।
भाजपा यूपी चुनाव में बसपा के वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने के लिए दलित, अति दलित और अति पिछड़ा की हिसाब से प्लानिंग कर रही है। प्रदेश भर में इन जातियों को इकट्ठा करने और उसे वोट बैंक में तब्दील करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री राम शंकर कठेरिया को जिम्मेदारी दी गई है। कठेरिया ने अपनी इस मुहिम को कानपुर से शुरू किया है। जल्द ही वे प्रदेश के दूसरे जनपदों में भी इसकी शुरुआत करेंगे। दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए हर बूथ पर 21 टोलियां बनाई गई हैं। टोलियों में शामिल वे कार्यकर्ता हैं, जिनकी दलितों के बीच पहचान है।
इन्हीं के जरिए हर बस्ती से एक दो पालक तैयार किए जाएंगे, जो पूरी बस्ती को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी उठाएंगे। इन टोलियों में महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा दलित समाज से जुड़े रिटायर्ड फौजी, अधिकारी, धर्म गुरु सभी का इस्तेमाल इस रणनीति के लिए में किया जाएगा। पूर्व कें द्रीय मंत्री कठेरिया ने बताया कि बसपा को इस चुनाव में पछाड़ने के लिए जरूरी है कि गली-मोहल्लों के दलित मतदाताओं में भाजपा को मजबूत किया जाए। इसके लिए प्रदेश स्तर पर बस्तियों और उनमें रहने वालों का सर्वे किया जा रहा है।