विधायक श्यामप्रकाश द्वारा की गई पोस्ट
- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को लौटे प्रवासी श्रमिकों को सहारा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही मनरेगा को लेकर गोपामऊ से भाजपा विधायक श्यामप्रकाश ने करारा तंज कसा है। अपनी फेसबुक पोस्ट में विधायक ने मनरेगा को गरीब मजदूरों के पसीने की कीमत बताया है।
यह भी लिखा है कि जिसने रिश्वत नहीं ली, उसका डोंगल (डिजिटल सिग्रेचर सार्टिफिकेट) ही नहीं लगता। एक वर्ष होने पर भी हजारों मनरेगा मजदूरों का भुगतान अब तक न होने पर भी उन्होंने सवाल खड़ा किया है।
गोपामऊ से भाजपा विधायक श्यामप्रकाश ने सोमवार को अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि मनरेगा गरीब मजदूरों के पसीने की कीमत है, लेकिन प्रधान फर्जी भुगतान के लिए मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि मस्टर रोल और स्टीमेट से ही प्रधान को कमीशन देने की शुरुआत करनी पड़ती है।
विधायक ने यह भी लिखा है कि अधिकारी अगर केवल गरीबों की इस योजना में कमीशन लेना छोड़ दें और सख्त कार्रवाई करें तो भ्रष्टाचार रुक सकता है। विधायक ने लिखा है कि सड़कें बनवाने के विवाद में प्रधानों को अपनी जान तक देनी पड़ती है। जिसने रिश्वत नहीं दी उसका डोंगल नहीं लगता। यहां बता दें कि डोंगल (डिजिटल सिग्रेचर सार्टिफिकेट) से ही मनरेगा का भुगतान होता है।