सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि पांच जुलाई 2015 को शहर में एक दुकान पर कब्जे को लेकर विवाद हो गया था। मामले ने सांप्रदायिक रंग ले लिया और दंगा भड़क गया। इसी मामले में सुनवाई करते हुए शुक्रवार को जिला जज मुशीर अहमद अब्बासी ने सुब्रत पाठक समेत सभी 29 आरोपियों को बरी कर दिया।
इसी मामले में हत्या के भी सभी आरोपी बनाए गए थे। इसमें यह सभी 27 नवंबर 2018 को ही बरी हो चुके हैं। बताया कि पांच जुलाई 2015 में हुए दंगे में सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बगिया फजल इमाम निवासी शकील ने 20 नामजद लोगों पर दंगा भड़काने और हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि इन लोगों की फायरिंग से उसके पिता अकील की मौत हुई थी।
बरी किए गए लोगों में भाजपा नेता सुब्रत पाठक, वर्तमान पालिकाध्यक्ष शैलेंद्र अग्निहोत्री, भाजपा नेता वीर सिंह भदौरिया, सौरभ कटियार, अमित दुबे, रंजीत कश्यप, श्यामजी मिश्रा, छोटू यादव, अंकित दुबे, विशाल शुक्ला, विक्रांत अग्निहोत्री, ऐशू कनौजिया, चीनी कनौजिया, बिरजू, नीतिश तिवारी, शिवम मिश्रा, रामजी मिश्रा, गुड्डू यादव, मनु गुप्ता, ज्ञानू यादव, बाबी कटियार आदि हैं।