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Fatehpur: अध्यक्षी की घोषणा से पहले चक्रव्यूह में फंसे भाजपा जिलाध्यक्ष, पचास लाख लेने का आरोप

Sat, 15 Feb 2025 05:24 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

Fatehpur News: जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर संगठन में बड़ा पद दिलाने के लिए पचास लाख लेने का आरोप है। 
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जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा आलाकमान को कई जिलाध्यक्षों की घोषणा करनी है। इससे पहले ही भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पार्टी के ही कुछ नेताओं के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। उनके ऊपर पार्टी फंड के नाम पर 50 लाख रुपये लेने का आरोप पूर्व क्षेत्रीय मंत्री अजीत गुप्ता ने लगाया है। यह दिसंबर 2024 का लिखा पत्र अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इसके बाद से पार्टी के अंदर खलबली मची हुई है। वहीं, जिलाध्यक्ष मानहानि का नोटिस दिए जाने की बात कह रहे हैं।
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भाजपा से कानपुर बुंदेलखंंड क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय मंत्री रहे बांदा निवासी अजीत गुप्ता ने भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को 10 दिसंबर को पत्र लिखा। उसके माध्यम से जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर आरोप लगाया कि संगठन में बड़ा पद दिलाने के लिए पार्टी फंड में पैसा जमा करने के नाम पर 50 लाख रुपये लिए हैं, लेकिन पैसा संगठन के कोष में जमा नहीं किया गया। उन्होंने पत्र में बुंदेलखंड, कानपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल के नाम का भी जिक्र किया है।

लिखा है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष के माध्यम से फंड में धनराशि जमा करने की बात कही गई थी। ये पत्र शुक्रवार शाम सोशल मीडिया के कई माध्यम में तेजी से वायरल हो रहा है। इसके जारी होने के राजनैतिक कई मायने लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष चयन की प्रक्रिया पूरी करके जल्द नए अध्यक्ष की घोषणा होनी है। इस सियासत के चलते पत्र को जारी करके जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को दोबारा पद में बैठाने से रोकना है। इस पत्र के वायरल होने से प्रदेश स्तर पर हलचल बढ़ गई है। जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल भी अपनी सफाई दे रहे हैं। इससे उनकी अध्यक्षी भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि राजनैतिक षड़यंत्र के तहत छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। वे कानूनी नोटिस देकर मानिहानि का दावा करेंगे।
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जिलाध्यक्ष का मामला पेंडिंग में पड़ा
प्रदेशभर में जिलाध्यक्षों की घोषणा जल्द होगी, लेकिन जनपद में इसका नाम शामिल नहीं है। दरअसल, जिलाध्यक्ष चयन को लेकर नामांकन के लिए 50 प्रतिशत से अधिक मंडलध्यक्षों का होना जरूरी है। वर्तमान में 23 में 11-11 मंडलध्यक्ष का ही चयन हुआ है। ऐसे में नामांकन प्रक्रिया अटकी है। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष सीधे जिलाध्यक्ष की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन वह भी नए प्रदेश अध्यक्ष ही कर सकते हैं। उसके लिए भी 50 प्रतिशत से अधिक जिलाध्यक्षों की घोषणा जरूरी है। ऐसे में जनपद में जिलाध्यक्ष की घोषणा में अभी कई महीने लग सकते हैं।

जमीन से कब्जा हटने के बाद फूटा बम
इस पूरे प्रकरण को लेकर एक जमीन का मामला सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि एक सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने की थी। उस जमीन पर कई भाजपा नेताओं के भी प्लॉट थे। प्रशासन ने जमीन को कब्जा मुक्त कराया। इसके बाद पत्र का बम फूटा।
 
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