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सवर्ण वोटरों की एकजुटता से ढहा ‘बसपा का किला’

Sat, 18 Mar 2017 10:06 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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बसपा सुप्रीमो मायावती
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भाजपा ने इस बार कई मिथक तोड़े हैं। राम लहर के बाद मोदी नाम की हवा से भारतीय जनता पार्टी ठाकुर और ब्राम्हण वोटरों को एक साथ रिझाने में कामयाब रही। इसका बड़ा फायदा बीजेपी के प्रत्याशियों को मिला। इस तरह सवर्णों ने एकजुट होकर बीएसपी की वोटबैंक वाली विधानसभा सीटों का किला ढहा दिया।  
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कानपुर देहात की सिकंदरा विधान सभा सीट पर बसपा को भाजपा ने करारा दर्द दिया है। नये परिसीमन के पहले इस क्षेत्र से बसपा की मिथिलेश कटियार को मतदाताओं ने विधायक बनाया था। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में भाजपा के देवेंद्र सिंह उर्फ भोले, सपा से कमलेश पाठक व बसपा के इंद्रपाल पाल ने चुनाव लड़ा था । हाल के चुनाव में ब्राम्हणों व ठाकुरों नेे भाजपा के देवेंद्र सिंह उर्फ भोले व सपा के डा. कमलेश पाठक को वोट दिया था।

इन दोनों जातियों के वोटरों के बिखरने के चलते इसका लाभ बसपा के इंद्रपाल को मिला और वह भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले से दो हजार तथा डा. कमलेश पाठक से करीब 6 हजार के अंतर से चुनाव जीत गए थे। इस बार भाजपा ने पूर्व मंत्री मथुराप्रसाद पाल को तथा सपा ने पूर्व सांसद राकेश सचान की पत्नी सीमा सचान एव बसपा ने महेंद्र कटियार को प्रत्याशी बनाया था। पिछले चुनाव में ठाकुरों और ब्राम्हणों के बटवारे का लाभ पाने वाली बसपा को सबक सिखाने के लिए ठाकुरों एवं ब्राहम्णों ने भाजपा पर विश्वास जताकर भाजपा प्रत्याशी मथुरा प्रसाद पाल के पक्ष में मतदान कर बसपा के किले को ढहा दिया। इस बार बसपा का जनाधार 54 हजार से घटकर 49 हजार रह गया। जब कि सपा का 48 हजार से घटकर 42 हजार रह गया।  भाजपा  52 हजार से बढ़ कर 87 हजार पहुंच गई। भाजपा के करिश्मे की आज भी चर्चा है।
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