कानपुर में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में जिमनास्ट कोच विश्वेश्नर नंदी और जिमनास्ट दीपा करमाकर ने जिमनास्ट को लेकर लोगों को जानकारियां दीं। कोच विश्वेश्नर नंदी ने कहा कि- मैने स्पोर्ट्स को लेकर खुद को समर्पित किया है। मैने अपना ही रिकॉर्ड ब्रेक किया था।
देश के लिए खेलना और मेडल लेना खासकर ओलंपिक जैसे खेल में मेडल लेना देश के लिए गर्व की बात है। दुनिया की सबसे बड़ी खुशी यही है। मुझे 2001 में पता चला कि पैरा स्पोर्ट्स भी होता है। जब मैं ग्राउंड पर पहुंचा तो मुझे आश्वचर्य हुआ। दिव्यांग होने की वजह से लोगों ने मुझसे कई सवाल किए। जब मुझे खेल रत्न मिला था तब मुझे लगा कि खिलाड़ी को कितने बदलाव की जरूरत है।
पैरालंपियन खिलाड़ी देवेंद्र झाझड़िया ने अमर उजाला संवाद में कहा कि कि खेल किसी का भी जीवन बदल सकता है। गीता ने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में लोग जिमनास्ट के बारे में नहीं जानते हैं अब लोग इसे समझने लगे हैं।
जिमनास्ट कोच बिश्वेश्वर नंदी ने कहा कि जब मैं गीता को ट्रेनिंग दे रहा था तो बहुत डर लगता था। मुझे ऐसे लगता था कि खतरनाक ट्रेनिंग में उसे कहीं कुछ हो न जाए मुझे जेल हो जाएगी। मैने ईश्वर का नाम लेकर उसे ट्रेंड किया। मैने गीता पर जितनी मेहनत की उसकी सफलता के बाद मैं भी सक्सेस हो गया।
ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन से पूरे देश में प्रशंसा पाने वाली जिम्नास्ट दीपा करमाकर ने बताया कि उन्होंने ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए अभी एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं लिया। दीपा को तराशने वाले उनके गुरू द्रोणाचार्य विजेता विश्वेश्वर नंदी ने बताया कि दीपा की सफलता का राज उनका बहुत ज्यादा गुस्सा है। वो जब तक खुद से संतुष्ट नहीं होती हैं तब तक कोशिश करती रहती हैं।