आईआईटी कानपुर का बायोलॉजिकल साइंस डिपार्टमेंट और दिल्ली का एक अस्पताल आर्टिफिशियल लिवर बना रहा है। इसका प्रारंभिक रिसर्च सफल रहा है और अब एनीमल ट्रायल चल रहा है। इसमें सफलता मिली तो मेडिकल साइंस में बड़ी क्रांति होगी।
आईआईटी के साइंटिस्ट प्रो. अशोक कुमार का कहना है कि आर्टिफिशियल लिवर की कीमत कम होगी लेकिन इसका प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टर और अस्पताल की फीस कितनी होगी, इसपर आईआईटी का कोई जोर नहीं होगा। आर्टिफिशियल लिवर के बाजार में आने में अभी समय लगेगा।
आईआईटी कानपुर और ग्लोबल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम की तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस ‘बायोटेक 2015’ शुक्रवार से शुरू हो गई। तीन दिवसीय कांफ्रेंस का उद्घाटन शुक्रवार को आईआईटी के निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना, जेएनयू नई दिल्ली के डीन प्रो. राकेश भटनागर ने किया, फिर प्रो. अशोक कुमार ने किया।
बायोलॉजिकल डिपार्टमेंट के प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि आर्टिफिशियल लिवर नेचुरल लिवर का स्थान नहीं ले सकता है लेकिन जब लिवर डैमेज हो जाएगा तो उसे रिप्लेस करके रिपेयर किया जा सकता है। कुछ समय बाद आर्टिफिशियल लिवर सही पोजिशन में आ जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह कांफ्रेंस पहली बार भारत में हो रही है। इसमें देश, विदेश के 200 एक्सपर्ट हिस्सा ले रहे हैं। सभी बायोलॉजिकल, मेडिकल और इंजीनियरिंग साइंस में हेल्थ केयर की भूमिका पर चर्चा करेंगे। साथ ही बताएंगे हेल्थ केयर के क्षेत्र में क्या नया होने जा रहा है।
गंभीर बीमारियों का इलाज सुविधा जनक और सस्ते ढंग से इलाज कैसे संभव होगा। एकेडमिक, इंडस्ट्रीज और पॉलिसी मेकर्स एक प्लेटफार्म पर आएंगे। जेएनयू से आए डीन ने एंथ्रेक्स बीमारी की जानकारी दी। कहा कि इस गंभीर बीमारी की वैक्सीन विकसित की जा चुकी है।
जापान और इंडिया के विभिन्न इंस्टीट्यूट से आए एक्सपर्ट ने हेल्थ केयर और मेडिकल बायो टेक्नोलॉजी के बारे में बताया। कहा कि 15 देशों के एक्सपर्ट डेंगू, स्वाइन फ्लू और इबोला सरीखी बीमारियों और उनके संभावित ड्रग, इलाज पर भी चर्चा करेंगे।
पॉलिसी मेकर डॉ. गोपाला कृष्णन ने एडवांस स्टडी पर फोकस तथ्य प्रस्तुत किए। स्टूडेंट्स ने पेपर प्रजेंटेशन दिया। प्रो. अशोक कुमार शनिवार को टिश्यू इंजीनियरिंग की जानकारी देंगे। बताएंगे कि आईआईटी कानपुर में बायोलॉजिकल, मेडिकल और इंजीनियरिंग साइंस में क्या-क्या काम हो रहा है।