कानपुर। कैंसर ही नहीं त्वचा रोगों में भी बॉयोप्सी कराना जरूरी होता है। इससे संंक्रमण की किस्म की पहचान हो जाती है। विश्व स्तर पर त्वचा रोग गैर घातक बीमारियों में चौथे स्थान पर हैं। त्वचा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह बात एक दिवसीय राज्य स्तरीय इमेंटोपैथोलॉजी अपडेट सीएमई में विशेषज्ञों ने बताई। सीएमई का उद्घाटन रीजेंसी हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. अतुल कपूर ने किया।
सीएमई का आयोजन रीजेंसी हॉस्पिटल के लैब साइंसेस विभाग की ओर इंडियन एसोसिएशन आफ पैथोलॉजिस्ट्स एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स (आईएपीएम) के यूपी चैप्टर के बैनर तले कमलानगर में किया गया। दिल्ली की डॉ. सोनल शर्मा ने बताया कि कुष्ठ रोगी इलाज के बीच में ही दवाएं छोड़ दे रहे हैं। इससे इलाज की तमाम सुविधाओं के बावजूद रोग पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। रोगियों का इलाज मुफ्त होता है। इसके अलावा सरकार राशन समेत विभिन्न सुविधाएं मुफ्त देती है। दवाएं बीच में छोड़ देने से संक्रमण पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता।
दिल्ली के डॉ. एमके सिंह, डॉ. मीनाक्षी बटनानी, आईएपीएम के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अतीन सिंघई, एसजीपीजीआई के डॉ. आरएन राव, मुजफ्फरनगर डॉ. श्वेता ग्रोवर, डॉ. किंजल बयानी ने त्वचा रोगों से संबंधित जांचों, हिस्टोलॉजिकल तकनीकों के बारे में बताया। इस मौके पर आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. अंजलि तिवारी, सचिव डॉ. नुपुर त्रिवेदी, डॉ. शेफाली अग्रवाल, डॉ. दीप्ति गुप्ता, डॉ. वैभव अग्रवाल, डॉ. पंकज मिश्रा, डॉ. पंकज चौहान, डॉ. कृति सिंह, डॉ. गुंजन बंगा, डॉ. शरद शर्मा, डॉ. सुमित श्रीवास्तव, डॉ. निहारिका जोशी आदि रहीं।