बायोमेट्रिक हाजिरी मशीनों का हाल
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रजिस्टर में हाजिरी दिन फिर लौट आए
इसी के आधार पर कर्मचारियों का वेतन जारी होता था। देर से आने पर कर्मचारी को अनुपस्थित माना जाता था। उस दिन का वेतन भी कट जाता था। फिर कोरोना फैल गया। मशीनों पर अंगूठा लगाने पर रोक लग गई। कार्यालयों में हाजिरी रजिस्टरों में लौट आई। लंबे समय तक बायोमेट्रिक हाजिरी मशीनो का प्रयोग नहीं हुआ। ऐसे में कई कार्यालयों में मशीनें खराब हो गईं और इन्हें हटा दिया गया। बाकी जगह खराब मशीनें यूं ही दीवारों लटकी हैं और...रजिस्टर में हाजिरी दिन फिर लौट आए।
कलेक्ट्रेट, जीएसटी भवन से मशीकें ही गायब
कलेक्ट्रेट, स्टेट जीएसटी कार्यालय, यूपीसीडा, श्रम आयुक्त कार्यालय में करीब 10 से 15 हजार कर्मचारी काम करते हैं। सभी कार्यालयों के मुख्य द्वार पर 2018 में बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गईं थीं। हाजिरी भी इन्हीं से दर्ज होती थी। कोरोना काल बीतते-बीते इन कार्यालयों से भी मशीनें गायब हो गईं। इन कार्यालयों के नाजिर बताते हैं चीनी मशीनें थीं, जो न चलने से खराब हो गईं।
समाजकल्याण में शोपीस बनीं मशीन
विकास भवन में करीब 18 विभागों के कार्यालय हैं। इसमें से समाजकल्याण विभाग के ऑफिस में बायोमेट्रिक मशीन लगी थी। अब यह मशीन खराब है। विभाग के कर्मचारियों का फिर से मनमाने समय पर आना-जाना चालू हो गया है। रजिस्टर में हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य विभाग के कार्यालय में बायोमेट्रिक मशीन नहीं लगी थी।
मनरेगा ऑफिस में लगी नहीं, आरईएस से गायब
ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों से जुडे मनरेगा कार्यालय में 2019 में बायोमिट्रिक्स मशीन लगाने के आदेश सीडीओ ने दिए थे, लेकिन नहीं लगाई गई। इसी तरह ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और डूडा कार्यालय में मशीन तो लगी थी, लेकिन कोरोना के बाद वो कहां गईं, इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है। दोनों कार्यालयों में रजिस्टर पर ही हाजिरी लगती है।
उर्सला में भी मशीन लाइलाज
उर्सला अस्पताल में कोरोना से पहले बायोमीट्रिक मशीन से कुछ दिन उपस्थिति दर्ज कराई गई थी। तकनीकी गड़बड़ी के चलते उससे उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती थी और रजिस्टर पर नाम लिखना ही पड़ता था। मशीन खराब हुई, फिर दोबारा ठीक नहीं हो पाई। निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने कहा कि मैं जब से यहां आया हूं, उपस्थित रजिस्टर में ही दर्ज हो रही है।