कानपुर देहात। बिकरू कांड के मुख्य मामले में आरोपी चौबेपुर थाने में तैनात रहे दरोगा केके शर्मा की ओर से दिए गए खुद के निर्दोष होने के प्रार्थना पत्र पर गुरुवार को कोर्ट में बहस हुई।
बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि आरोपी के खिलाफ कोई चश्मदीद गवाह व कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। विकास से बातचीत के आरोप लगाए हैं जबकि उसकी कॉल डिटेल भी नहीं है। कोर्ट ने मामले में अब सुनवाई की तिथि 11 अप्रैल तय की है।
दो जुलाई 2020 को बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी मारे गए थे। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है।
पुलिस ने चौबेपुर थाने के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी व हल्का इंचार्ज दरोगा केके शर्मा पर भी आरोप पत्र दाखिल किया है। दस जनवरी को सुनवाई के दौरान दरोगा केके शर्मा के अधिवक्ता रामनरेश मिश्रा ने आरोपी के निर्दोष होने से संबंधित प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
इस पर गुरुवार को बहस हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामनरेश मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि चौबेपुर थाने के सिपाही अभिषेक कुमार व राजीव कुमार के बयानों के आधार पर दरोगा केके शर्मा को आरोपी बनाया गया है। जबकि ऐसे कोई साक्ष्य नहीं हैं।
घटना के समय दरोगा केके शर्मा ड्यूटी से वापस आकर आराम कर रहे थे। वहीं, मुख्य आरोपी विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैज जिले के महाकाल थाना क्षेत्र में पकड़ा गया था।
वहां पुलिस की तरफ से की गई पूछताछ के बाद जो रिपोर्ट एसएसपी कानपुर को भेजी गई है, उसमें भी आरोपी दरोगा केके शर्मा का कोई जिक्र नहीं है। मामले में सुनावई के दौरान आरोपियों की कोर्ट में पेशी नहीं हुई। कोर्ट ने अब सुनवाई की तिथि 11 अप्रैल तय की है।