फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिकरू कांड : गैंगस्टर मामले में बचाव पक्ष के सवालों में उलझे इंस्पेक्टर, आगे की सुनवाई अब एक नवंबर को

विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर देहात। बिकरू कांड के आरोपियों पर लगे गैंगस्टर मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता के सवालों में वादी इंस्पेक्टर उलझ गए। वह कई सवालों का जवाब भी नहीं दे सके। मामले की आगे की सुनवाई के लिए अदालत ने एक नवंबर की तारीख तय की है।
विज्ञापन

दो जुलाई 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद पुलिस ने 30 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-पांच गैंगस्टर बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही है।
मामले में वादी मुकदमा इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय से बचाव पक्ष जिरह कर रहा है। शुक्रवार को मामले में आरोपी धर्मेंद्र दुबे उर्फ हीरू, धीरेंद्र उर्फ धीरू, मनीष उर्फ बीरू, गोविंद सैनी, सुरेश वर्मा, रमेशचंद, संजू दुबे, गोपाल सैनी व दयाशंकर अग्निहोत्री की ओर से अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने जिरह शुरू की।
विज्ञापन

अधिवक्ता ने इंस्पेक्टर से जिरह करते हुए पूछा कि मामले में बीट सिपाही ने अभ्यस्त अपराधियों की सूचना क्या अपराध रजिस्टर के फ्लाई सीट में अंकित की थी। इस पर इंस्पेक्टर ने जानकारी होने से इनकार किया। बचाव पक्ष ने हीरू दुबे का हिस्ट्रीशीट नंबर पूछा तो इंस्पेक्टर जवाब नहीं दे सके।
अधिवक्ता ने पूछा कि क्या अपराध रजिस्टर नंबर-चार में बीट सिपाही की कोई गोपनीय सूचना उक्त आरोपी के संबंध में अंकित थी। इस पर इंस्पेक्टर ने जानकारी दे पाने से इनकार किया। बचाव पक्ष ने पूछा कि आरोपी हीरू दुबे कथित गैंग लीडर हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद पुलिस निगरानी में था तो अपराध में कैसे लिप्त रहा। इंस्पेक्टर इस सवाल में लड़खड़ा गए।
काफी सोचने के बाद कहा कि हिस्ट्रीशीट बिकरू कांड के बाद खोली थी। बचाव पक्ष ने पूछा कि कथित गैंग लीडर हिस्ट्रीशीट पर था तो इसका विवरण गैंग चार्ट में क्यों छुपाया गया। इस सवाल के जवाब में इंस्पेक्टर ने कहा कि मैं इसका कोई कारण नहीं बता सकता। अधिवक्ता ने पूछा कि सभी आरोपी जिला कारागार में बंद है क्या उसके बाद भी गिरोह क्रियाशील है या नहीं। इस सवाल का जवाब इंस्पेक्टर नहीं दे सके।
अधिवक्ता ने पूछा कि यदि कथित गैंग की क्रियाशीलता संपूर्ण जनपद में थी, तो जनपद के अन्य थानों के बीट सिपाही की रिपोर्ट का गैंग चार्ट बनाने से पहले आपने अध्ययन किया था। इसका जवाब देते हुए इंस्पेक्टर ने बताया कि रिपोर्ट मंगाई गई थी, लेकिन गैंग चार्ट में उसका हवाला नहीं दिया गया है। बचाव पक्ष ने इसका कारण पूछा, तो इंस्पेक्टर जवाब नहीं दे सके।
हालांकि विशेष लोक अभियोजक अमर सिंह भदौरिया ने बचाव पक्ष के कई सवालों का विरोध किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि सभी आरोपी कोर्ट में पेश किए गए। अधिवक्ता सीपी शुक्ला की जिरह पूरी हो गई है।
आरोपी संजय दुबे उर्फ संजू, बालगोविंद व शिवम दुबे की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद त्रिपाठी ने भी जिरह पूरी कर दी है। अब दो आरोपी अखिलेश दीक्षित व जय बाजपेई की ओर से जिरह बाकी है। आगे की जिरह के लिए अदालत ने एक नवंबर की तिथि तय की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें