बिकरू कांड की एक मात्र चश्मदीद (पुलिसकर्मियों के अलावा) मनु पांडेय को पुलिस ने गवाह बनाया है। पुलिस ने उसके खिलाफ मिले साक्ष्यों को दरकिनार कर दिया है। मनु के न तो साजिश में शामिल होने और न ही बदमाशों का साथ देने की बात कही जा रही है। एक तरह से उसको क्लीन चिट दे दी गई है। साफ है कि अब मनु जेल नहीं जाएगी। हालांकि अफसर अभी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
बिकरू गांव में 2 जुलाई 2020 की रात जिस घर में सीओ देवेंद्र मिश्रा की हत्या हुई थी वह मनु पांडेय का था। मनु की कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हुईं, जो वारदात से ठीक पहले और बाद की हैं। पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की थी। अब उसको बिकरू कांड में गवाह बनाया है। पुलिस जल्द ही मामले में अंतिम पूरक चार्जशीट जल्द ही दाखिल करेगी।
इन तथ्यों को साजिश नहीं माना
पुलिस ने पहली चार्जशीट जब लगाई थी तो उसमें मनु को लेकर लिखा था कि उसके खिलाफ कुछ साक्ष्य मिले हैं, जिससे अंदेशा है कि मनु ने बदमाशों का साथ दिया है। हालांकि इन साक्ष्यों की पुष्टि नहीं हुई। अब ये देखना है कि कोर्ट में उसको लेकर क्या दस्तावेज व दावे पुलिस पेश करती है। ये भी सवाल है कि क्या मनु आरोपी अपने पति के खिलाफ गवाही देगी।
ये अहम तथ्य हैं
मनु की कई रिकॉर्डिंग वायरल हुई थीं। वारदात के पहले की रिकॉर्डिंग से ये साफ हुआ था कि उसने विकास के कहने पर अपने ससुर को फोन करके बुलाया। वारदात के बाद दीपक दुबे की पत्नी को फोनकर पूरी घटना बताई थी। पूछा था कि मोबाइल कहां छिपा दे। ऐसी तमाम अहम रिकॉर्डिंग जांच में शामिल हैं। विवेचक का कहना है कि इससे ये साबित नहीं होता है कि वो साजिश में शामिल थी या किसी की हत्या की है। वो डरी हुई थी और रिश्तेदारों को इसके बारे में बात रही थी। ये अपराध नहीं है।
तो फिर इनका क्या कसूर
कॉल रिकॉर्डिंग जैसे पुख्ता साक्ष्य होने के बावजूद मनु को आरोपी नहीं बनाया गया लेकिन दो दिन पहले बिकरू गांव पहुंची खुशी दुबे पर डेढ़ दर्जन धाराएं लगाई गई हैं। अमर दुबे की मां, विकास की नौकरानी को भी जेल भेजा गया है। किसी पर पुलिस को ललकारने तो किसी पर हत्या करने के साथ हमलावरों को असलहा-कारतूस देने का आरोप लगा है। सवाल है कि जब मनु निर्दोष है तो इनको किस आधार पर आरोपी बनाया गया।