जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में गुरुवार की सुबह चार बजे पंजगाम में सेना के कैंप पर फिदायीन हमला हुआ। इस हमले में सेना ने अपने तीन बहादुरों को खो दिया। सेना के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया की ओर से इस हमले के बारे में जानकारी दी गई है।
कुछ वर्ष पहले ही कमीशंड हुए कैप्टन आयुष यादव भी इस हमले में शहीद हो गए। वे कानपुर के जाजमऊ इलाके के रहने वाले थे। आतंकी हमले में शहीद हुए कैप्टन आयुष की उम्र महज 26 साल थी। कैप्टन आयुष के साथ एक जूनियर कमांडिंग ऑफिसर (जेसीओ) और एक जवान भी शहीद हुए हैं। बता दें कैप्टन आयुष इस वर्ष किसी आतंकी हमले में शहीद होने वाले इंडियन आर्मी के दूसरे ऑफिसर हैं।
पिता ने रोते हुते सरकार से किया ये सवाल
आयुष अपने परिवार के साथ 165, डिफेंस कॉलोनी जाजमऊ में रहते थे। इनके परिवार मे पिता अरुण कांत यादव, माता सरला यादव और बहन रूपल यादव हैं। कानपुर में तैनात सेना के कर्नल दुष्यन्त सिंह ने परिजनों को आयुष के शहीद होने की सूचना दी। बेटे की मौत की खबर मिली तो मां सरला यादव बेसुध हो गई। परिवार में गमगीन माहौल है।
अमर उजाला के पत्रकार ने आयुष के घर जाकर उनके पिता से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा आयुष की मौत की जिम्मेदार केंद्र सरकार है। चित्रकूट में एसआई पद पर तैनात अायुष के पिता अरुण बोले गवर्नमेंट की पॉलिसी की वजह से ही मेरा बेटा शहीद हुआ है। अगर वह सीमा पर लड़कर शहीद होता तो मुझे जरा भी दुख नहीं होता। जम्मू-कश्मीर में हालात ऐसे बने हुए हैं जिस पर सरकार ध्यान ही नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कोई भी सरकार हो इन्होंने अपना रवैया ऐसा बनाया हुआ है कि जब सत्ता इनके हाथों में होती है तो दूसरी बोली बोलते हैं और जब विपक्ष में बैठे होते हैं तो दूसरी बोली बोलते हैं। ये कहते हुए उन्होने सीधे केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
अरुण कांत ने बताया अभी कल शाम की ही बात है जब हमारी बात बेटे से हुई थी। हमने आयुष को कुछ दिन के लिए घर आने को कहा तो उसने मना कर दिया। कारण पूछा तो वह वहां के हालात बयां करने लगा। उसने बताया या पथराव हो रहा है। ऐसे हालात में घर आना बेहद मुश्किल है।
अरुण कांत ने आगे बताया 5 फरवरी को आयुष अपनी बहन की शादी में आया था। वह इस दौरान घर पर दस दिन रुककर गया था। आयुश की शादी करनी बांकी थी। लेकिन इससे पहले ही वह...
अरुण ने बताया आयुष को अपने चाचा और ताऊ से सेना में जाने की प्रेरणा मिली थी। उसके चाचा और ताऊ सेना से रिटायर्ट अफसर हैं। इसके अलावा मेरे भांजा-भाजी भी सेना में है।
पितां ने आखिर में रोते हुए सरकार से सवाल किया कि “आखिर कब तक ऐसे ही सैनिक मरवाते रहोगे? मैंने तो अपना बेटा खो दिया।”