उमर गौतम ने 20 साल की उम्र में इस्लाम धर्म अपनाया था। उसके बाद संगठन बनाकर लोगों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने लगा। अलीगढ़ विवि और जामिया जैसे संस्थानों में लेक्चर देने जाता था। यहां भी उसका एजेंडा इस्लाम का प्रचार करना और गैर मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करना होता था।
नौकरी, शादी और पैसों का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। नोएडा से गिरफ्तार किया गया डॉ. मोहम्मद उमर गौतम कई बार कानपुर और फतेहपुर समेत आसपास के जिलों में सभाएं कर चुका है।
विज्ञापन
यहां पर वह अपने संगठन से जुड़े लोगों की मदद से गैर मुस्लिमों को जुटाकर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करता था। इसके लिए बाकायदा उसकी स्पीच के पोस्टर भी जारी किए जाते थे। सात साल में 10 से अधिक सभाएं की हैं। सुरक्षा एजेंसियां आयोजकों और उनमें शामिल होने वालों का पता लगाने में जुट गई हैं।
उमर गौतम ने 20 साल की उम्र में इस्लाम धर्म अपनाया था। उसके बाद संगठन बनाकर लोगों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करने लगा। अलीगढ़ विवि और जामिया जैसे संस्थानों में लेक्चर देने जाता था।
विज्ञापन
यहां भी उसका एजेंडा इस्लाम का प्रचार करना और गैर मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करना होता था। सूत्रों के मुताबिक उमर ने कई बार कानपुर और फतेहपुर में भी बैठकें की हैं। बाकायदा उसके लेक्चर की तैयारी की जाती थी। इसमें गैर मुस्लिमों को बुलाया जाता था।
कानपुर के आधा दर्जन लोग रडार पर
जांच एजेंसियों को उमर की कानपुर व उसके आसपास जिलों की गतिविधियों की पूरी जानकारी मिली है। यह भी पता चला है कि इन शहरों के कौन-कौन लोग उमर से जुड़े थे। कानपुर के करीब आधा दर्जन ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं। एजेंसियां उनकी भूमिका तलाश रही हैं। कई से पूछताछ भी हो चुकी है। जिसके जिसके खिलाफ साक्ष्य मिलते जाएंगे, सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई करती जाएंगी।
कानपुर के एक संगठन से कनेक्शन की आशंका
2017 में आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल का एटीएस ने खुलासा किया था। इसमें जाजमऊ स्थित एक इस्लामिक संगठन का नाम सामने आया था। पता चला था कि संगठन के दफ्तर में आतंकियों ने कई बार बैठकें की और मकसद तय किया। अब जब उमर का कानपुर व फतेहपुर कनेक्शन सामने आया है तो सुरक्षा एजेंसियां पता कर रही हैं कि उमर का इस इस्लामिक संगठन से कोई ताल्लुक है या नहीं।
मौलाना उमर के पास अरबों की संपत्ति होने का खुलासा
धर्मांतरण के मामले में पकड़े गए फतेहपुर जिले के रहने वाले मौलाना उमर गौतम की कई जगहों पर अरबों की संपत्ति होने का पता चला है। अकेले गाजियाबाद में उसकी काफी अचल संपत्ति होने का पता एटीएस को चला है। जिले के एक स्कूल में भी फंडिंग करने की आशंका जताई गई है।
पुलिस स्कूल से जुड़े लोगों की कुंडली और बैंक डिटेल खंगाल रही है। उधर, उमर के कनेक्शन खंगालने के लिए एटीएस जल्द जनपद भी आ सकती है। थरियांव पुलिस मंगलवार को पंथुआ गांव जांच करने पहुंची। शहर में रहने वाले भाई उदयभान के बयान दर्ज किए हैं।
एटीएस ने जनपद पुलिस से मौलाना उमर गौतम के करीबियों और उनकी प्रापर्टी संबंधी जानकारी मांगी है। एसपी सतपाल अंतिल के निर्देश पर थरियांव पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थरियांव थानेदार नंदलाल सिंह ने उमर के शहर में रहने वाले भाई उदयभान सिंह के बयान लिए और उमर के संबंध में पूछताछ की।
उन्होंने पुलिस को उमर गौतम से कोई वास्ता न होने की बात कही है। हालांकि पुलिस को गाजियाबाद में अरबों की अचल संपत्ति होने का पता चला है। पुलिस ने ग्रामीणों से भी उमर के बारे में पूछताछ की। उधर, एटीएस उमर से जुड़े कई लोगों का बैंक डिटेल खंगाल रही है।
शहर में संचालित एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में मौलाना उमर द्वारा मोटी फंडिंग किए जाने की चर्चा है। लोगों का कहना है कि इस स्कूल में उमर गौतम ने बड़ी रकम की फंडिंग की है। उमर गौतम जब भी गांव आता था तो अंदौली का एक व्यक्ति हमेशा उसके साथ रहता था।
इस व्यक्ति का बहुआ रोड पर एफसीआई गोदाम के समीप ट्रैक्टर ट्राली बनाने का कारखाना है। मो. उमर जब भी जनपद आया, तो इसी शख्स ने सारी व्यवस्थाओं को देखा। कई लोगों ने उससे वित्तीय मदद भी ली है। थानेदार नंदलाल सिंह ने बताया एटीएस मामले की पड़ताल के लिए कभी भी फतेहपुर आ सकती है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।