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धड़ल्ले से चल रहीं टेनरियां, प्रदूषण बोर्ड बेखबर, होश उड़ा देंगे ये आंकड़े

Mon, 01 Apr 2019 05:30 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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तालाबंदी के बावजूद तमाम टेनरियां धड़ल्ले से चल रही - फोटो : अमर उजाला
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अफसरों की मिलीभगत से कानपुर के जाजमऊ में तालाबंदी के बावजूद तमाम टेनरियां धड़ल्ले से चल रही हैं। रविवार को इसका खुलासा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में पहुंचे क्षमता से तीन गुना ज्यादा क्रोमियमयुक्त जहरीले पानी (टेनरी वेस्ट) पहुंचने से हुआ। क्रोमियम भी मानक से कई गुना ज्यादा होने से पानी हरा नजर आ रहा था। प्लांट से ओवरफ्लो होकर पानी आसपास भर गया। इससे शोधन कार्य भी प्रभावित हुआ। मोटरें फुंकने का खतरा है।
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जाजमऊ क्षेत्र की टेनरियों से रोज औसतन दो करोड़ लीटर जहरीला पानी निकलता है, जबकि वाजिदपुर (जाजमऊ) स्थित सीईटीपी की क्षमता रोज 90 लाख लीटर टेनरी वेस्ट शोधन की है। शेष जहरीला पानी गंगा में जाता है। कुंभ के मद्देनजर तीन महीने पहले सिर्फ 26 टेनरियों को चलाने की अनुमति दी गई। शेष टेनरियां बंद करा दी गई थीं। गंगा प्रदूूषण नियंत्रण इकाई ने जाजमऊ क्षेत्र के चारों पंपिंग स्टेशनों से गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने के लिए बंधे भी बनाए थे।

इलाकाई लोगों के अनुसार कुंभ के दौरान कुछ टेनरियां अवैध रूप से चल रही थीं, पर कुंभ खत्म होते ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिलीभगत से तमाम टेनरियां चलने लगी हैं। इससे सीईटीपी में टेनरी वेस्ट बढ़ने लगा। सीईटीपी प्लांट के कर्मचारियों ने बताया कि प्लांट में रविवार सुबह से बहुत ज्यादा टेनरी वेस्ट आने लगा। क्षमता से ज्यादा पानी आने की वजह से संचालन प्रभावित होने लगा।
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सामान्यतौर पर प्लांट के दो पंप चलाए जाते थे, पर ज्यादा टेनरी वेस्ट आने से चार पंप चलाने पड़े। इसके बावजूद जहरीला पानी प्लांट से ओवरफ्लो होकर शाम तक आसपास फैलता रहा। दोपहर 2:15 बजे तक 2.80 करोड़ लीटर पानी सीईटीपी में पहुुंच चुका था। शाम तक यह मात्रा तीन करोड़ लीटर से ज्यादा हो गई। मौके पर पहुंचे जल निगम के मुख्य अभियंता एके गुप्ता और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई परियोजना प्रबंधक घनश्याम द्विवेदी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य अधिकारियों को सूचना दी। 

बंधा बनाने से भी खुली कलई  
बताया गया कि पहले सीईटीपी की क्षमता से जितना ज्यादा टेनरी वेस्ट निकलता था, वह पंपिंग स्टेशनों से ओवरफ्लो होकर या अन्य नाले, नालियों के माध्यम से गंदा में जाता था, पर कुंभ से पहले पंपिंग स्टेशनों से गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने के लिए बंधे बना दिए गए। नाले भी बंद कर दिए गए। इस वजह से सीपीईटी में ज्यादा पानी पहुंच रहा है। इससे टेनरियों की बंदी की कलई खुल गई है।

टेनरियों की जांच ठप 
कुंभ के दौरान टेनरियों पर निगरानी रखने के लिए डीएम ने कमेटियां बनाई थीं, पर कुंभ खत्म होते ही निगरानी बंद हो गई। शासन ने बंद कराई गई टेनरियों को पुन: चलाने की अनुमति नहीं दी है। फिर भी तमाम टेनरियां चोरी-छिपे चल रही हैं।


बंदी के बावजूद बहुतायत में टेनरियां चल रही हैं। इसी वजह से रविवार को सीईटीपी में क्षमता से तीन गुना से भी ज्यादा पानी आया है। वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई है। टेनरियों पर अंकुश लगाने का आग्रह किया गया है। 
- एके गुप्ता, मुख्य अभियंता, जल निगम

यदि टेनरियां बंद होतीं तो प्लांट में इतना ज्यादा टेनरी वेस्ट नहीं पहुंचता। ज्यादा पानी आने की वजह से प्लांट का संचालन प्रभावित हुआ। मोटरें भी फुंकने का खतरा है। 
- घनश्याम द्विवेदी, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई
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सरकारी आंकड़े
- जाजमऊ में टेनरियों की संख्या- 402
- कुंभ से पहले संचालित होने वाली टेनरियां- 260
- कुंभ के दौरान बंद कराई गई टेनरियां- 234
- चल रही टेनरियां- 26
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