आरोपी सुंदरलाल कुशवाहा, रोते-बिलखते मृतक के परिजन
पुनर्जन्म का दावा करने वाले सुंदरलाल कुशवाहा उर्फ सद्गुरू के दावे पर ग्रामीणों ने कभी विश्वास नहीं किया। इधर ढोंगी बाबा यज्ञ व भंडारा के सहारे लोगों के बीच जरूर पैठ बनाता रहा। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि लल्लू यादव, बिलहड़ी के प्रधान जयवीर खंगार, बांकी गांव निवासी सिद्धगोपाल श्रीवास, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गौरीशंकर सोनी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सुंदरलाल पुर्नजन्म का दावा करता था। मगर यह बात किसी के समझ नहीं आती थी। गांव के बाहर खाली पड़ी ग्राम समाज की जमीन पर मौहरदेवी की स्थापना करने के साथ यज्ञवेदी व भंडारे का कई बार आयोजन कर चुका है। जिसमें ग्रामीणों ने जरूर सहभागिता की है। मगर किसी ने उसे कृष्णावतार नहीं माना। सद्गुरू द्वारा किए गए इस कृत्य की सभी ने निंदा की है। साथ ही कहा कि उसने इस बार समाधि लेने से पहले समय पूरा होने पर नया करने की बात जरूर कही थी। और उसने अपने शिष्य की हत्या कर कुकृत्य कर डाला जिससे गांव में दहशत का माहौल है।
खुद को कृष्णावतार बताकर धड़ से अलग कर दिया शिष्य का गला, हत्या के बाद गायब हो गया गुरू
मायाजाल फैलाकर बनाया आलीशान बंगला
घटनास्थल पर एएसपी व सीओ थानाध्यक्ष से जानकारी लेते हुए
बांक गांव निवासी किसान रामप्रसाद का पुत्र सुंदरलाल कुशवाहा परिवार के साथ कभी खपरैलदार मकान पर रहता था। इधर उसने मायाजाला फैलाया तो आमदनी का जरिया बढ़ गया। ग्रामीणों ने बताया कि अटूट कमाई आने के चलते उसने गांव के एक कच्चे मकान को गिरवाकर आलीशान बंगला बनवा लिया। इसी मकान में उसकी पत्नी व बच्चे रहते हैं। जबकि वह खुद दूसरे कच्चे मकान में गददी लगाकर बैठता था और वही पूजा अर्चना कर लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण कराने का दावा करता था।
‘भगवान का अवतार’ बनकर फैलाया मायाजाल और फिर ड्राइवर को बना दिया सोहंगदेव उर्फ श्यामबाबा
परिजनों का रो-रोकर बुराहाल
रोता बिलखता मृतक का पुत्र जीतू
पुजारी शिवहंगदेव उर्फ घनश्याम उर्फ श्यामबाबा की हत्या की खबर पाकर मौके पर पहुंचे मृतक की पत्नी रजोला व पुत्र जीतू व सचिन शव देखकर दहाड़े मारकर रोने लगे। पुलिस ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए शीघ्र हत्यारोपियों को गिरफ्तार करने की बात कही। मृतक के पुत्र जितेंद्र उर्फ जीतू ने बताया कि उनका परिवारिक चाचा मैकूलाल चार पांच अज्ञात लोगों के साथ बोलेरो में उसके घर आए थे और उसके पिता श्यामबाबा को समझा बुझाकर अपने साथ ले गए थे। मृतक के पुत्रों ने आशंका जताई कि गुरू के साथ हत्या करने में चार पांच लोग अवश्य शामिल हैं। क्योंकि श्यामबाबा को साथ ले जाने वाला उनका चाचा मैकूलाल भी घटना के दिन से फरार हैं।
हत्या में और लोग भी हो सकते शामिल
घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों की भीड़
घटना स्थल का जायजा लेने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि हत्या में कई लोग शामिल हो सकते हैं। क्योंकि जहां पर हत्या की गई है, वहां जमीन और दीवारों पर खून के छींटे साफ नजर आ रहे हैं। उसके बाद शव को घटना स्थल से उठाकर करीब 100 मीटर दूर खंडहर में फेंका गया है। इससे साबित होता है कि एक व्यक्ति शव को इतनी दूर ले जाकर नहीं फेंक सकता। पुलिस भी इन सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक लालसाहब यादव ने कहा कि दोनों गुरू शिष्य थे। इनके बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसी के चलते शिष्य की हत्या कर दी है। कहा कि घटना की कई जांच से बता चलेगा कि हत्या में कितने लोग शामिल हैं। उन्होंने नरबलि जैसी घटना से इनकार किया है। उधर मृतक के पुत्र जितेंद्र कुमार की तहरीर पर गुरू सुंदरलाल उर्फ सद्गुरू देव के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।