लखनऊ से नई दिल्ली जाने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के रनिंग स्टाफ को ट्रेन में महिला के साथ बिना टिकट बच्ची का होना अपहरण का मामला लगा। टीटीई ने पहले बच्ची का टिकट बनाया और बाद में इटावा स्टेशन पर दोनों को जीआरपी को सौंप दिया। बच्ची के लगातार रोने और टिकट न होने की वजह से यह शक हुआ। सत्यापन के बाद बच्ची महिला की सगी भतीजी निकली। इस पर जीआरपी ने दूसरी ट्रेन से रवाना किया।
स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के सी-9 कोच की 22 नंबर बर्थ पर शनिवार लखनऊ से नई दिल्ली जाने के लिए कांतादेवी नाम की महिला चढ़ी। उसके साथ एक बच्ची थी, जो बगल में बैठी थी, लेकिन वह रो रही थी। टीटीई मोहन झा ने पहले उससे पूछताछ की। बाद में उस बच्ची का टिकट 1480 रुपये का बनाया। हालांकि बच्ची के लगातार रोने की वजह से टीटीई को अपहरण का शक हुआ। इस पर कंट्रोल में मैसेज कर महिला और बच्ची को जीआरपी इटावा के सुुपुर्द कर दिया। बाद में जीआरपी ने सत्यापन किया तो बच्ची उस महिला की भतीजी निकली। इसके बाद दोनों को दूसरी ट्रेन से नई दिल्ली भेजा गया।