वसंत पंचमी (basant panchami) आज धूमधाम से मनाई जाएगी। बसंत उत्सव हर समाज अपने तरीके से मनाता है। कोई पूजा करता है तो कोई भोजन करवाता है। मान्यता है कि विद्या और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
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माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प कला की देवी माना जाता है। इस दिन को श्रीपंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद दानपुण्य किया जाता है। कुंभ में वसंत पंचमी का स्नान होगा। इस कारण इसका विशेष महत्व है।
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ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषाचार्य मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ है। यह दिन अबूझ मुहूर्त होता है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन पूजा का उपयुक्त समय दोपहर का माना जाता है।
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ऐसे करें वसंत पंचमी की पूजा
सुबह स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें। सबसे पहले कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें, फिर मां सरस्वती की पूजा करें। आचमन व स्नान कराएं, फिर माता का श्रृंगार कर उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करें। प्रसाद के रूप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। श्वेत फूल माता को अर्पण करें। संगीत से जुड़े लोग अपने माथे पर तिलक लगाकर मां की आराधना कर सकते हैं व मां को बांसुरी भेंट करें।
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शुभ मुहूर्त
सुबह 6:52 से दोपहर 12:23 बजे तक
पंचमी तिथि प्रारंभ-शुक्ल पंचमी दोपहर 12:25 बजे से शुरू
पंचमी तिथि समाप्त-10 फरवरी को दोपहर 2:08 बजे तक
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बंगाली समाज मूर्ति रखकर पूजा करता है
स्वरूप नगर निवासी अमिताभ बासु ने बताया कि सरस्वती माता की पूजा करते हैं और उनसे विद्या और ज्ञान मांगते है। समाज के सभी लोग मूर्ति रखकर घर में पूजा-अर्चना करते हैं। फल, दूध की मिठाई का भोग लगाते हैं और इसी प्रसाद को वितरित करते हैं। शाम को माता का गुणगान होता है।
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पंजाबी समाज शबद कीर्तन करता है
गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब जीटी रोड के प्रधान जसवंत सिंह ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन पतंग उड़ाई जाती है। विशेषकर पंजाब में अधिकांश लोग पतंगबाजी पर्व में भाग लेते हैं। शहर में गुरुद्वारों में सुबह शबद कीर्तन होता है। बसंत पंचमी केशबद पढ़े जाते हैं। प्रसाद वितरित होता है।
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विश्नोई समाज बसंती गुलदस्ता भेंट कर भोग लगाता है
विश्नोई समाज के ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया कि सुबह स्नानादि के बाद सरस्वती देवी का पूजन करते हैं। भगवान को बसंत का गुलदस्ता अर्पित कर बसंती प्रसाद का भोग लगाते हैं। इसमें प्रमुख रूप से बसंती मक्खन, बसंती पेड़े, बसंती बताशों का भोग लगाया जाता है। शाम को पूड़ी सब्जी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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महाराष्ट्र समाज एकाधिकार न हो की कामना करता है
महाराष्ट्र समाज के प्रकाश खरवड़कर ने बताया कि सरस्वती माता ऐश्वर्य की देवी है। इसका कारण है कि ऐश्वर्य ज्ञान और शांति से ही मिलता है। यह आने पर अहंकार भी आ जाता है। ऐसे में एकाधिकार न हो इसकी कामना अवश्य करते हैं। सुबह पूजा-अर्चना के समय घर के सभी लोग एकत्र होकर ज्ञान, शांति और ऐश्वर्य की कामना करते हुए आशीर्वाद लेते हैं।
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ऐसी शुरू हुई वसंत पंचमी में पूजा
मान्यता है कि जब सरस्वती देवी प्रकट हुईं तो भगवान श्रीकृष्ण को देखकर उन पर मोहित हो गईं और उनसे पत्नी रूप में स्वीकारने का अनुरोध किया। पर श्रीकृष्ण ने राधा के प्रति समर्पण जताते हुए मां सरस्वती को वरदान दिया कि आज से माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रूप में पूजा करेगा। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की। तब से लेकर निरंतर वसंत पंचमी के दिन उनकी पूजा अर्चना लोग करते आ रहे हैं।
भूल कर भी न करें ये कार्य
- वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें।
- वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए।
- वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें।
- इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए।
- वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना बेहत जरूरी है।