केंद्र और प्रदेश सरकार की रोजगारपरक योजनाओं को बैंकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। उद्योग विभाग से 138 लोगों की ऋण लेने की पात्रता साबित होने के बाद बैंकों ने महज 11 लोगों को ही लोन दिया।
कानपुर में शनिवार को मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में कमिश्नर सुभाष चंद शर्मा ने बैंकों की ओर से ऋण देने की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई। कमिश्नर ने सबसे पहले रोजगारपरक योजनाओं की समीक्षा की। संयुक्त आयुक्त उद्योग से कहाकि उनका विभाग रोजगार बढ़ाने की दिशा में ध्यान नहीं दे रहा है। पात्र व्यक्ति को बैंक ऋण नहीं दे रहे तो इसकी शिकायत क्यों नहीं करते? एक महीने में ऋण देने की गति में तेजी न आई तो कार्रवाई को तैयार रहें।