डेथ वारंट जैसा नोटिस खौफ में आ गया व्यापारी
मृतक के भाई ने बताया कि बीते 25 मई को प्रमोद के नाम एक सरकारी नोटिस आया, जिसे देखकर उसके होश उड़ गए। उस नोटिस में पुरानी ढाई लाख की रकम को ब्याज सहित बढ़ाकर पांच लाख रुपये का बकाया दर्शाया गया था और तुरंत भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
कर्ज चुकाने के बाद भी अचानक आए इस डेथ वारंट जैसे भारी-भरकम नोटिस ने प्रमोद को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया। वह लगातार मानसिक तनाव और डिप्रेशन में रहने लगा। इसी घबराहट और लोक-लाज के डर से उसने बृहस्पतिवार की रात फंदे पर झूलकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
जांच में जुटी पुलिस, खंगाले जा रहे हैं बैंक के दस्तावेज
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ ही उस कथित नोटिस को भी अपने कब्जे में ले लिया है, जिसने एक हंसते-खेलते व्यापारी को मौत के मुंह में धकेल दिया। पुलिस अब इस बात की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है कि यह विवादित नोटिस आखिरकार किस बैंक से और क्यों जारी किया गया था।
बांदा पुलिस के अनुसार व्यापारी की आत्महत्या के मामले में परिजनों के बयानों के आधार पर गहनता से जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि नोटिस किस वित्तीय संस्थान से आया था और लोन चुकाने के दावों में कितनी सच्चाई है। युवक किन परिस्थितियों में इस कदर मानसिक तनाव में आया, इसकी हर एंगल से पड़ताल की जा रही है। दोषी पाए जाने पर बैंक कर्मियों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।