भुइयां रानी गांव में ढोल की थाप पर दिवारी नृत्य का प्रदर्शन करते मौनिहार
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बांदा जिले में पैलानी तहसील क्षेत्र के भुइयां रानी गांव में दिवारी नृत्य की धूम रही। भुइयां रानी में क्षेत्र के 24 से अधिक गांवों के मोनिहारों ने आकर पहले तालाब में अपने मोर पंखों को धोकर शिव की पूजा की। इसके बाद दिवारी नृत्य किया। दिवारी नृत्य में ढोलक की थाप, घुंघरू की झंकार, लाठी की चटकार और हैरत में डाल देने वाले कारनामे यहां की दिवारी नृत्य में देखने के लिए मिले।
मोनिहारों का नृत्य हर किसी को आकर्षित कर गया। वृद्ध मेड़वा ने बताया कि बुंदेलखंड में दिवारी नृत्य की परपंरा वर्षों पुरानी है। दीपावली के दिन मिट्टी की बनी ग्वालिन का पूजन किया गया। बताया कि दीपावली के दूसरे दिन सुबह गाय के बच्चे की पूंछ को पूजकर दिवारी खेलने के लिए निकल जाते हैं।
मौन धारण करने वाले पूरे दिन अन्न जल ग्रहण नहीं करते। सुबह से लेकर रात तक दिवारी नृत्य खेलते हैं। विभिन्न प्रकार के आकर्षित कपड़ों को पहनकर हाथों में मोर के पंखों को लेकर और तरह-तरह का श्रंगार कर ढोल की थाप पर थिरकते हैं। भुइयां रानी गांव में इस आयोजन में शेखर गुप्ता प्रधान प्रतिनिधि पिपरोदर, राकेश बाजपेयी, राजू साहू, मिश्रीलाल निषाद व क्षेत्र के गांवों के कई लोग मौजूद रहे।