कोर्ट ने की छानबीन, तो खुला मामला
इस बीच शातिर सिपाही ने अदालत के कूटरचित दस्तावेज बनवाए, जिसमें उसे दोषमुक्त किया गया था। ये दस्तावेज उसने 28 जून 2016 को विभाग को सौंपे। इस आधार पर उसका निलंबन रद्द हुआ। बहाल होकर वह कई साल तक नौकरी करता रहा। इस बीच मुख्य आरक्षी पद पर प्रमोशन भी पा गया। इधर तारीखों पर कोर्ट में पेश न होने के कारण न्यायालय ने 12 जून 2024 को इस केस की प्रगति आख्या मांगी तो पूरा मामला खुल गया। जांच में स्पष्ट हो गया कि मुख्य आरक्षी ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे खुद को दोषमुक्त बताने वाला निर्णय विभाग को दिया है।
एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने मुख्य आरक्षी भाई लाल के ऊपर कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक भाई लाल इस समय लखीमपुर खीरी जनपद में तैनात है। नरैनी कोतवाली इंस्पेक्टर संदीप तिवारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि मुख्य आरक्षी ने कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर अपने को दोषमुक्त करा लिया था। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर गुमराह करना, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।