मासूम प्रियांशु व रपटे के पास लगी भीड़
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पैलानी थाना क्षेत्र के गांव पड़ोहरा स्थित चंद्रावल नदी के रपटे में तीन वर्षीय पुत्र को दीवार पर चढ़ाकर रपटा पार कर रही मां की दुनिया उजड़ गई। दीवार से बच्चे का पैर फिसल जाने से वह नदी में समा गया। स्थानीय नाविकों ने उसकी तलाश की लेकिन बहाव तेज होने की वजह से वह नहीं मिल सका। मौके पर प्रशासनिक अमला और पीएसी की टीम पहुंची, फिलहाल बच्चे की तलाश जारी है।
पैलानी थाना क्षेत्र के गांव पड़ोहरा निवासी शशि ने बताया कि वह अपने पुत्र प्रियांशु (3) व ससुर सुखदेव के साथ पैलानी जा रही थी। प्रियांशु को बुखार आ रहा था तो उसे डॉक्टर को दिखाना था। बुधवार को सुबह करीब साढ़े आठ बजे वह पड़ोहरा स्थित चंद्रावल नदी के रपटे में बनी दीवार पर प्रियांशु को चढ़ाकर रपटा पार करने लगी, वैसे ही संतुलन बिगड़ने से उसकी बच्चे से पकड़ ढीली पड़ गई, इससे बच्चा दीवार से फिसलकर नदी में जा गिरा। बहाव अधिक होने से वह नदी में बह गया।
उधर हादसा देख वहां मौजूद स्थानीय नाविकों बलबीर निषाद, छोटे, कल्लू, बंटा भूरा आदि ने नदी में छलांग लगाकर बच्चे की तलाश शुरू की। पड़ोहरा निवासी बदलू वर्मा ने थाना इंस्पेक्टर राममोहन राय को सूचना दी। इसके अलावा जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह को घटना की जानकारी दी।
एसडीएम के निर्देश पर तहसील पैलानी में रुकी हुई फतेहपुर की 12 बटालियन पीएसी के हेड कांस्टेबल अवसान अली व फूलचंद वर्मा व छह कांस्टेबल के साथ पडो़हरा रपटा पहुंचकर मोटर बोट से तलाश की। चिल्ला से आए गोताखोरों राकेश निषाद बिंदा आदि पांच गोताखोरों एवं अमारा से आए रामलाल समेत चार गोताखोरों ने चंद्रावल नदी में तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।
तीन वर्षीय प्रियांशु के बाबा सुखदेव पाल ने बताया कि उसका बेटा संतोष पाल सूरत, अहमदाबाद में रहकर मेहनत मजदूरी करता है। घटना को लेकर सूचना दे दी गई है। घटना के बाद मां शशि एवं दादी दुर्गी का रो-रो कर बुरा हाल है। बच्चा दो बहनों में इकलौता भाई था। पैलानी थाना इंस्पेक्टर राममोहन राय ने बताया कि नदी में तलाश की गई है, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। तलाश जारी है।
पड़ोहरा रपटे पर पूर्व में भी हो चुकी घटनाएं
चंद्रावल नदी पर बने पड़ोहरा रपटा में एक साल के भीतर यह तीसरी घटना है पूर्व में पपरेंदा गांव निवासी राजेश कुमार व मड़ौली गांव निवासी 70 वर्षीय श्रीपाल कुटार की डूबने से मौत हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पड़ोहरा का रपटा करीब दो माह से क्षतिग्रस्त है और यहां से आवागमन बंद है। इसके कारण लोगों को आमरा गांव के रास्ते करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। हालांकि कई ग्रामीण मजबूरी में टूटे रपटे से होकर ही आवागमन करते हैं। बुधवार का हादसा इसी जोखिम भरे रास्ते पर हुआ। घटना के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बीच थाना क्षेत्र को लेकर कहासुनी होने की बात भी सामने आई।