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एंटीबायोटिक दवाएं हजम कर रहे बैक्टीरिया, नहीं होता कोई असर, केंद्र सरकार के सर्वे में सामने आए ये सच

Tue, 25 Jun 2019 06:41 PM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के सिविल लाइंस के प्रीतम कुमार (42) का टायफॉयड ठीक नहीं हो रहा है। वे दो बार एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा कर चुके हैं। जांच में पता चला कि उन्हें बीमार करने वाले बैक्टीरिया अब एंटी बायोटिक से मर नहीं रहे, दवाएं खाकर हजम किए जा रहे हैं। प्रीतम की आदत रही है कि वे अक्सर बुखार आने पर किसी भी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद कर खा लेते थे।
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यह स्थिति केवल प्रीतम की नहीं है। ऐसे हजारों रोगी हैं, जिनमें एंटी बायोटिक रिसेस्टेंट पैदा हो गया है। एएमआर प्रोजेक्ट की सर्वे जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कानपुर परिक्षेत्र के 10 फीसदी रोगी एंटीबायोटिक से रिसेस्टेंट हो गए।

एंटीबायोटिक दवाओं के रिसेस्टेंट बढ़ने के खतरे के मद्देनजर केंद्र सरकार का नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल का एएमआर प्रोजेक्ट मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में चल रहा है। इसमें हैलट और दूसरे अस्पतालों में आने वाले रोगियों की एंटीबायोटिक रिसेस्टेंस की जांच की जा रही है। खासतौर पर ग्राम निगेटिव और ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया की जांच की जा रही है।

इनमें अधिक बैक्टीरिया वे हैं, जो आमतौर पर रोगियों को बीमार करते हैं। ये बैक्टीरिया आसपास की गंदगी और निजी रूप से व्यक्ति के सफाई न रखने पर होती है। गड़बड़ स्थिति यह है कि एंटी बायोटिक दवाओं के प्रति रोगाणुओं में प्रतिरोधक क्षमता पैदा होने का यह ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। इसे रोकने के लिए नई दवाओं का प्रोटोकॉल शुरू किए जाने की रणनीति बनाई गई है।

ग्राम पॉजीटिव बैक्टीरिया
स्टेपेफेलो कॉकस, स्टेपटोकॉकस, इंट्रो कॉकस आदि
ये बैक्टीरिया सेप्टीसीमिया, सांस तंत्र का संक्रमण, मल्टी आर्गन फेल्योर आदि खतरनाक बीमारी पैदा करते हैं।

ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया
इकोलाई, सॉल्वोनेला, सूडोमोनास
ये बैक्टीरिया पेशाब तंत्र का संक्रमण, डायरिया, टायफॉयड आदि रोग करते हैं और सूडोमोनास हॉस्पिटल संक्रमण देता है। इससे भी मल्टी आर्गन फेल्योर होता है।

 
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बचाव
- बिना सोचे समझे मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं लेकर न खाएं
- रोग होने पर अस्पताल जाकर प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह पर दवा लें
- शरीर की और खाने-पीने की सफाई रखें।
- बाहर से आने पर साबुन से हाथ अवश्य धोएं।

- 10 फीसदी रोगियों में एंटीबायोटिक से रिसेस्टेंस पैदा हो गया। यह ट्रेंड बढ़ रहा है। केंद्र सरकार इसका सर्वे करा रही है। इसके लिए दवाओं का नया ग्रुप तैयार किया जा रहा है। इस संबंध में लोगों को तथा अस्पताल के स्टाफ को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- प्रोफेसर जीसी उपाध्याय, माइक्रोबायोलॉजी विभाग
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