आय से अधिक संपत्ति और धमकी देने की शिकायत के बाद कार्रवाई, डीएम के निर्देश पर शुरू हुई जांच
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। कलेक्ट्रेट में वर्षों से एक ही सीट पर जमे बाबुओं के खिलाफ आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया। स्टाम्प लिपिक के पद पर करीब आठ साल से तैनात रहे बाबू के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों को डराने की शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर न सिर्फ संबंधित लिपिक को महत्वपूर्ण सीट से हटा दिया गया, बल्कि कलेक्ट्रेट में लंबे समय से जमे सात अन्य बाबुओं के भी तबादले कर दिए गए हैं।डीएम की करवाई के बाद कालेक्ट्रेट चर्चा का विषय बना रहा।
स्टाम्प लिपिक नितिन प्रकाश गुप्ता और एसडीएम सदर कार्यालय से जुड़े बाबुओं के खिलाफ लगातार शिकायतें जिलाधिकारी तक पहुंच रही थीं। शिवराजपुर निवासी ओम द्विवेदी ने स्टाम्प लिपिक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और प्रभावशाली अधिकारियों का नाम लेकर कार्रवाई का भय दिखाने की शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। इसके बाद वर्षों से स्टाम्प अनुभाग पर जमे नितिन प्रकाश गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। इनको सीआरए शाखा में भेज दिया गया है। इसके साथ वे परीक्षा संबंधी कार्य भी देखेंगे। इसके साथ मामले की जांच एडीएम न्यायिक महेश कुमार को सौंपी गई है। जांच में आय, संपत्ति और शिकायतों से जुड़े आरोपों की जाँच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौपेंगे। इसके साथ अन्य बाबुओं का भी तबादला कर दिया गया है।
बाबुओं के तबादले से मची हलचल
डीएम के निर्देश और शासन की तबादला नीति के तहत एडीएम सिटी आलोक गुप्ता ने देर रात कई लिपिकों के कार्यक्षेत्र बदल दिए। लंबे समय से एक ही शाखा में तैनात कर्मचारियों को हटाकर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।एसडीएम सदर कार्यालय के वाचक सोमिल दीक्षित को स्टाम्प लिपिक बनाया गया है। उन्हें नजूल लिपिक का अतिरिक्त कार्य भी सौंपा गया है। वहीं नकल नवीस अभिलेखागार में तैनात अपूर्वा तिवारी को एसडीएम सदर का वाचक बनाया गया है। इसके अलावा आराधना मिश्रा को आबकारी लिपिक, बबिता को अभिलेखागार शाखा, पुष्पेंद्र कुमार को सीलिंग लिपिक का अतिरिक्त प्रभार और आकांक्षा सक्सेना को एसीएम पंचम के वाचक का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। आदेश जारी होने के बाद कलेक्ट्रेट में चर्चा इस बात की भी है कि वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे कर्मचारियों को लेकर शिकायतें पहले भी उठती रही थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत सामने आने और मामला सीधे जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ।