पुलिस और सीबीआई के लिए अबूझ पहेली बना बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित
पुलिस से लेकर सीबीआई तक के लिए अबूझ पहेली बन चुका बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित यूपी में फर्रुखाबाद जिले के कंपिल स्थित आश्रम की जमीन पर तिरपाल तान कर ज्ञान देता था। 1998 में जेल जाने के बाद से बाबा का आज तक कोई पता नहीं चला। स्थानीय लोगों का मानना है। कि वह अब देश के बाहर ही रहता है। अब उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किए जाने से फिर चर्चा में आ गया है।
कंपिल कस्बे के मोहल्ला चौधरियान निवासी सोहन लाल दीक्षित का पुत्र वीरेंद्र देव शुरुआत से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। इसी के चलते 1975 में उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। 1984 में पिता की मौत के बाद वह घर वापस आ गया। वहां आकर एक छोटे से चबूतरे पर ज्ञान देना शुरू कर दिया। इसके बाद यह चबूतरा बड़े से भवन में कब तबदील हो गया। कंपिल स्थित पांच मंजिला इमारत सहित बाबा के देश भर में कई आश्रम हैं।
बाबा वीरेंद्र देव पर जम्मू में भी दर्ज है मुकदमा
वर्ष 1998 में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के कंपिल स्थित आश्रम पर पहली बार पुलिस ने छापा मारा था। तब कोलकाता के रहने वाले एक व्यक्ति ने शिकायत की थी कि बाबा ने उसकी बेटी को बंधक बना लिया है। तब पहली बार आश्रम पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सैकड़ों लड़कियों को छुड़ाया था। कार्रवाई के दौरान लाठीचार्ज तक की नौबत आ गई थी। तब बाबा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित पर जम्मू में उनके मकान मालिक मुकेश कुमार ने 2017 मे मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि पिछले चार साल से उनके घर में बाबा का केंद्र चल रहा है। बाबा और उसके बीच 11 साल 11 महीनों का प्रति माह एक हजार रुपये किराये पर मकान का किराया एग्रीमेंट हुआ है। लेकिन बाबा की ओर से उसे कोई किराया नहीं दिया गया। उसे उसके घर में नहीं घुसने दिया जाता है। और उसकी पत्नी को भी उसके खिलाफ भड़का दिया गया है। साथ ही उसने सेक्स रैकेट चलने की भी आशंका जाहिर की थी।
कोई सेवादार बोलने को नहीं होता है तैयार
2017 में बाबा के सेक्स रैकेट कांड के खुलासे के बाद वर्ष 2018 में अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की सूची जारी की थी। इसमें उन्होंने जनता से फर्जी बाबाओं का सामाजिक बहिष्कार करने के अपील की थी। इसी सूची में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित का नाम दूसरे नंबर पर था। जबकि पहले स्थान पर बस्ती के स्वामी सचिदानंद सरस्वती थे।
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित की तलाश तो पुलिस व सीबीआई करीब 20 साल से कर रही है। लेकिन वर्ष 2017 में बाबा के दिल्ली के रोहिणी स्थित आश्रम में सेक्स रैकेट के खुलासे के बाद से सीबीआई, महिला आयोग आदि ने बाबा पर शिकंजा कसना शुरू किया था। इसके बाद कंपिल व फर्रुखाबाद के सिकत्तर बाग स्थित आश्रम में सीबीआई व पुलिस टीम ने छापे मारे थे। तब भी पुलिस को वहां से कुछ सेवादार महिलाएं मिलीं थी। लेकिन कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ था। बाद में कंपिल आश्रम से करीब 35 महिलाओं को पुलिस टीम मेडिकल के लिए लोहिया अस्पताल तक लाई थीं। लेकिन कोई भी मेडिकल जांच को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।
2003 में आई युवती का नहीं चला पता, आश्रम में बने हैं छोटे-छोटे तहखाने
बाबा वीरेंद्र देव के कंपिल स्थित आश्रम में किसी बाहरी को घुसने की अनुमति नहीं है। वर्ष 2017 में जब पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां पर छापा मारा था तो आश्रम में बने छोटे छोटे कमरे तो मिले थे। साथ ही 30 से ज्यादा संवासिनियां भी वहां मिली थीं। इसके अलावा वहां बने अंडर ग्राउंड में किसी को जाने नहीं दिया गया था। वहीं, फर्रुखाबाद के सिकत्तरबाग स्थित आश्रम में छोटे छोटे दड़बेनुमा कमरे बने थे।
वर्ष 2003 में बाबा के एक सेवादार ने अपनी बेटी को आश्रम में भर्ती कराया था। इसके बाद वह एक बार बेटी से मिलने गया तो उसने उसे साथ चलने को कहा लेकिन वह साथ जाने को तैयार नहीं हुई। इस पर उन्होंने बेटी को वापस दिलाने की शिकायत भी की थी। उन्होंने बताया था कि केवल दो बार बेटी से फोन पर बात हुई है। आज तक नहीं पता वह कहां है।
अंग तस्करी की आशंका
कंपिल के चौधरियान मोहल्ले निवासी लोगों का कहना है कि आश्रम में आते जाते लोगों को तो हमेशा देखा है। लेकिन कभी किसी का शव आदि आश्रम से निकलते नहीं देखा। क्या यहां लोग मरते ही नहीं हैं। या फिर यहां पर शरीर के अंगों की तस्करी भी होती है।