बेरोजगारी व जॉब सिक्योरिटी के चलते भारी संख्या में इंजीनियर और मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके छात्रों ने बीटीसी (बैचलर ऑफ टीचिंग सर्टिफिकेट) की ओर रुख किया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 100 सीटों के अलावा निजी कॉलेजों की 1500 सीटों पर इस वर्ष बीटीसी प्रशिक्षण लेने के लिए सैकड़ों इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट डिग्री धारक ने एडमिशन लिया है।
इनमें बर्रा सात निवासी जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि बीटेक करने के बाद यूपी से बाहर 12 हजार की जॉब मिली थी। डेढ़ साल नौकरी करने के बाद अब इंजीनियरिंग में कोई भविष्य नहीं दिख रहा है, इसलिए बीटीसी कर शिक्षक बन जाऊंगा। वहीं, शास्त्री नगर निवासी कीर्ति अवस्थी को एक बड़े निजी मैनेजमेंट संस्थान से एमबीए की डिग्री लेने के बाद भी जॉब नहीं मिली तो उन्होंने भी बीटीसी की ओर रुख किया।
शिक्षक भर्ती के लिए उन्हें प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर की यूपी-टीईटी या सीटीईटी भी पास करनी होगी। बीटीसी का कोर्स दो साल का होता है। निजी कॉलेज की फीस करीब 42 हजार सालाना है। वहीं सरकारी फीस लगभग 8000 रुपये है। इसलिए सरकारी कालेज में मारामारी रहती है। वहीं सीटें सीमित होने से निजी कॉलेजों ने सीटों की बोली लगानी शुरू कर दी है।