सैफई। औरैया जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर शनिवार को हुए सड़क हादसे में मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम सैफई मेडिकल कॉलेज में नहीं हो सका। प्रशासन ने रविवार तड़के जिला मुख्यालय पर चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया। परिजनों ने औरैया जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
पीयूष यादव गुरुग्राम में मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर सीनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। शनिवार सुबह पीयूष अपनी मां नीता यादव, भाभी संजू उर्फ संजना व भातीजा आरव कानपुर जाने के लिए गाजियाबाद से निकले थे। शनिवार दोपहर 12 बजे वह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर औरैया जिले के एरवाकटरा थाना क्षेत्र के हरनागरपुर गांव के पास हाईवे पर खड़े गिट्टी लदे डंपर में पीछे से कार घुस गई।
हादसा इतना भीषण था कि कार के परखचे उड़ गए। चारों की मौके पर ही मौत हो गई थी, सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार में बुरी तरह से फंसे चारों शवों को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। चारों के शवों को दो बजे मेडिकल कॉलेज में बने शव ग्रह में रखवा दिया गया था।
जानकारी पर पहुंचे परिजनों ने बताया कि जिम्मेदार अधिकारी कोई सैफई नहीं आया था। रिश्तेदार सपा ब्लाक प्रमुख ककवन बिलोहर के प्रतिनिधि विनय यादव ने प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगाया कि चार लोगों की मौत हो गई। घटना दोपहर 12 बजे की है और वे लोग चार बजे से पंचनामा पोस्टमार्टम के लिए भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
सबसे बड़ी लापरवाही तो औरैया जिला प्रशासन की है। जब चारों लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी, तो उनके शवों को इतनी दूरी पर क्यों भेजा गया, भेजा गया तो जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं आए। बड़ी संख्या में आए रिश्तेदार व अन्य पारिवारिक सदस्य रात के अंधेरे में भटकते रहे।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शनिवार को पोस्टमार्टम के लिए मना कर दिया था। उनका कहना था कि रविवार को चारों का पोस्टमार्टम होगा। मामले की जानकारी जब डीएम के पास पहुंची तब देर रात थाना पुलिस ने शवों का पंचनामा भरा।
रविवार सुबह करीब चार बजे दोनों के शव मुख्यालय पहुंचे। रविवार सुबह छह बजे चारों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। यहां से परिजन शवों को कानपुर ले गए। नायब तहसीलदार अलख शुक्ला ने बताया कि डीएम के आदेश पर शवों का पोस्टमार्टम कराया गया।