पुलिस की गाड़ी में बैठी हत्यारोपी मां व डरा सहमा सोनू
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औरैया जिले में हत्यारिन बनी मां के हाथों से बच निकले आठ साल के मासूम सोनू की जुबान लड़खड़ा रही थी। मासूम की आंखों में अपने तीन भाइयों की मौत का खौफनाक मंजर तैर रहा था, फिर भी फिर भी उसने अपनी आंखों के सामने तीन भाइयों की मौत का मंजर बयां किया।
डरे सहमे सोनू ने बताया कि गुरुवार तड़के मां ने उसे व उसके भाइयों को उठाया। बताया कि हम सभी ननिहाल बरौआ चल रहे हैं। इस पर सभी खुश थे। ननिहाल में बच्चों का बचपन खूब मस्ती भरा होता है, लेकिन यह खुशी ही उन्हें मौत की ओर ले जा रही थी। उन्हें नहीं मालूम था कि उनकी मां प्रियंका उन्हें जान से मारने जा रहीं हैं। सेंगुर नदी से कुछ दूर पहले ही वह वाहन से उतर गई। रास्ते में बच्चों को बिस्कुट खिलाए। पैदल चलते हुए सेंगुर नदी के केशमपुर घाट पर पहुंची। सोनू के आंखों के सामने प्रियंका ने गोद में लिए दो साल के छोटे भाई मंगल को पहले नदी में फेंका।
यह देख सोनू कुछ चौंका, लेकिन फिर माधव, आदित्य व सोनू को प्रियंका डुबोने लगी। इसके बाद प्रियंका ने सोनू को भी पानी में डुबो दिया, लेकिन उसकी किस्मत ने साथ दिया। आठ साल का सोनू थोड़ी दूर पानी में जाकर किनारे की तरफ पहुंचते ही बाहर निकलकर जान बचाकर मौके से भागा। भाइयों को मौत के घाट उतरता देखने के बाद खुद की सलामती के लिए उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भागते हुए सोनू की नजर ग्रामीणों पर पड़ी तो उसने रुक कर पूरी बात बताई। ग्रामीणों ने उसे कपड़े पहनाए। इसके बाद वह लोग सेंगुर नदी की ओर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोनू के तीन भाई जान गवां चुके थे। यह मंजर सभी के लिए एक चौंकाने वाला था, लेकिन आठ साल के बच निकले सोनू की दिमागी स्थिति समझने वाली रही।
जिसने पल-पल सब कुछ देखा। भाइयों के शव सामने पड़े देख उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे। ये आंसू पोंछने वाली मां हत्यारन हो गई। पहले पिता का साथ छूटा। अब तीन छोटे भाई को गवां दिया। मां के मायाजाल का शायद ही कभी सोनू पर छाया पड़े। नानी गीता से लेकर अन्य परिजन सोनू को संभालते नजर आए।