तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया
पानी का बहाव इतना तेज था कि सेना के दो शेल्टर उसकी चपेट में आकर बह गए। उस समय कैंप में मौजूद सात जवान बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे। इनमें दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गयाम जबकि 5वीं ग्रेनेडियर में तैनात विनोद यादव समेत पांच जवान लापता हो गए थे। हादसे के बाद से ही सेना की ओर से लापता जवानों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ कामयाबी नही मिली।
सेना और प्रशासन से मिलने वाली हर सूचना का था इंतजार
बेटे के लापता होने की सूचना मिलने के बाद से परिवार के लोग लगातार सेना और प्रशासन से मिलने वाली हर सूचना का इंतजार कर रहे थे। गांव के लोग भी परिवार के संपर्क में रहे और विनोद की सकुशल वापसी की प्रार्थना करते रहे। उधर लापता जवानों की तलाश में सेना की खोज व बचाव टीमें लगातार अभियान चलाती रहीं। भारतीय सेना के साथ आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी तलाशी अभियान में शामिल रहीं।
पहचान के लिए डीएनए जांच कराई
दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में सेना की एविएशन यूनिट की मदद से भी संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई। हालांकि लगातार बारिश, पहाड़ी भूभाग और पानी के तेज बहाव के कारण बचाव एवं तलाशी अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहा। इसके बावजूद जवानों की तलाश लगातार जारी रखी गई। हादसे के बाद लगातार खोजबीन के दौरान बरामद अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई।
मां और परिजन फफक पड़े
26 सितंबर को डीएनए रिपोर्ट के आधार पर विनोद यादव की पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद सेना की ओर से उनकी अस्थियां परिजनों को सुपुर्द की गईं। अस्थियां घर पहुंचते ही परिवार के लोगों का धैर्य टूट गया। मां और परिजन फफक पड़े। बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा। आसपास मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।