दीवार पर लिखा था- मकान किराए पर खाली है
नौकरी में अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने, सेवानिवृत्ति के बाद अस्वस्थ रहने और सड़क हादसे का शिकार हो जाने के कारण वे लंबे समय तक अपने प्लॉटों की देखरेख करने नहीं आ सके। पीड़ित जब हाल ही में अपनी जमीन देखने औरैया पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सन्न रह गए। प्लॉट पर बने कमरे की दीवार पर लाल रंग से लिखा था। मकान किराए पर खाली है। साथ ही वहां दो मोबाइल नंबर और मालिक के रूप में शाहिद सुल्तान शेख का नाम लिखा हुआ था।
एमएलसी की शह पर गहरा आपराधिक षड्यंत्र रचा
जब पीड़ित ने इस बारे में गुपचुप तरीके से जानकारी जुटाई तो पता चला कि खानपुर निवासी अब्दुल सत्तार उर्फ सत्तार अहमद ने 17 जुलाई 1991 के एक कथित मुख्तारनामे (पावर ऑफ अटॉर्नी) का सहारा लेकर, पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक की शह पर गहरा आपराधिक षड्यंत्र रचा। कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि तहरीर पर प्राथमिक दर्ज कर लिया गया है। जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
गाली-गलौज की और धमकी भी दी
आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर पीड़ित के प्लॉटों का बैनामा कर दिया और शाहिद सुल्तान शेख व उसके बेटों को वहां अवैध कब्जा दिला दिया। मदन गोपाल का आरोप है कि जब उन्होंने अपने प्लॉट पर जाकर इस बात का विरोध किया तो आरोपी अब्दुल सत्तार उर्फ सत्तार अहमद अपने अन्य साथियों के साथ वहां आ धमका। आरोपियों ने पीड़ित के साथ सरेआम गाली-गलौज की और धमकी देते हुए कहा अगर दोबारा इस प्लॉट की तरफ दिखाई दिए, तो जान से मार देंगे।
पूर्व एमएलसी की सजा की खबर सुनकर आई हिम्मत
पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में लिखा है कि आरोपी अब्दुल सत्तार उन्हें लगातार पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के नाम और रसूख की धौंस देता था। कमलेश पाठक के भारी दबदबे के कारण पीड़ित में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह थाने जाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सके, लेकिन हाल ही में जब अखबारों के माध्यम से उन्हें पता चला कि पूर्व एमएलसी को कोर्ट से सजा हो गई है, तब जाकर उन्होंने पुलिस के पास आने की हिम्मत जुटाई।