उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2019 के बाद जिन प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू हुआ है, उनमें एक और पांच फीसदी की दर से जीएसटी अदा करना होगा। इसे ऐसे समझें कि 90 वर्गमीटर क्षेत्रफल या 45 लाख तक की कीमत वाले फ्लैट पर एक फीसदी और इससे व कीमत वाले फ्लैटों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी चुकाना होगा।
फ्लैट खरीदार यह भी देखें कि जीएसटी फ्लैट की कीमत में जुड़ा है या अलग से लिया गया। यह बात भी ध्यान देने वाली है कि यदि किसी प्रोजेक्ट को पूर्णता प्रमाणपत्र नहीं मिला है, लेकिन उसमें एक भी व्यक्ति रजिस्ट्री कराकर रह रहा है तो वहां फ्लैट खरीदने में किसी प्रकार की जीएसटी का भुगतान नहीं करना होगा।
12 फीसदी से घटी दर
फ्लैट की बिक्री पर पहले 12 फीसदी की दर से जीएसटी लिया जाता था। बाद में इसे घटाते हुए दो कैटेगरी में बांट दिया गया। अब यह दरें पांच और एक फीसदी हैं।
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वर्जन
कई बार देखने में आया है कि बिल्डर खरीदार से तो जीएसटी ले लेते हैं, लेकिन विभाग में इसका भुगतान नहीं करते। इसके लिए जरूरी है कि फ्लैट खरीदार बिल्डर से टैक्स इनवाइस की मांग करें। इनवाइस में दर्ज रकम से पता लग जाएगा कि जीएसटी का भुगतान किया गया है या नहीं। - संतोष गुप्ता, कर सलाहकार
फ्लैट खरीदने वाले का पूरा ध्यान इसी पर रहता है कि प्रोजेक्ट विवादित तो नहीं है या समय पर पजेशन मिलेगा या नहीं। जीएसटी के बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं होती। बिल्डर इसी का फायदा उठाते हैं। लोगों को चाहिए कि वे प्रोजेक्ट के साथ जीएसटी की भी पूरी जानकारी लें। - धर्मेंद्र श्रीवास्तव, सीए