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ओपेन स्कूल चैंपियनशिप में अथर्व-प्रणय अव्वल

Mon, 11 Jan 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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आईआईटी के टेकफेस्ट ‘टेककृति 2016’ के तहत रविवार को ओपेन स्कूल चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला हुआ। इसमें कक्षा 9, 10, 11 और 12वीं के 100 स्टूडेंटों ने हिस्सा लिया।
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सबने अपना-अपना प्रोजेक्ट जमा किया और एक्सपर्ट के सामने विस्तार से जानकारी दी। जिन स्टूडेंटों का प्रोजेक्ट अच्छा रहा, उनमें से छह को बेस्ट का खिताब मिला है। साथ ही लैपटॉप और आईपैड देकर सम्मानित किया गया।

ओपेन स्कूल चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने वाले 10 स्टूडेंटों को आईआईटी की प्रतियोगी परीक्षा जेईई एडवांस की नि:शुल्क तैयारी कराई जाएगी। यह एलान अवंती संस्था ने किया। इसकी स्थापना आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र ने की है। इसका सेंटर कानपुर, मुंबई सहित देश के तमाम शहरों में है।
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टेककृति के मीडिया हेड शुभम मित्तल ने बताया कि ओपेन स्कूल चैंपियनशिप का पहला राउंड अक्तूबर में शुरू हुआ, जिसमें 25 शहरों के 5000 स्टूडेंटों ने हिस्सा लिया था। स्क्रीनिंग के बाद 500 स्टूडेंटों का सेलेक्शन किया गया, फिर अलग-अलग चरणों में कार्यक्रम हुए और 100 स्टूडेंट छांटे गए। इन सबका फाइनल मुकाबला रविवार को हुआ।

छह स्टूडेेंट को पुरस्कार मिला। इन सबको प्रतियोगी परीक्षा की नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी। चार और स्टूडेंटों का सेलेक्शन हुआ है।  

पूल ए (कक्षा 9, 10)
अथर्व चौकसे, इंदौर फर्स्ट
अल्पेश जैन, ग्वालियर सेकेंड
मानसी वजारकर, इंदौर थर्ड

पूल बी (कक्षा 11, 12)
केकेवी प्रणय, बंगलूरू फर्स्ट
शुभांकर लोहंदे, बंगलूरू सेकेंड
मानसा, बंगलूरू थर्ड

3 से 6 मार्च तक टेककृति
टेककृति का आयोजन 3 से 6 मार्च को होगा। इसमें देश, विदेश के तमाम इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट हिस्सा लेंगे। सब बिजनेस प्लान बनाकर देंगे, फिर जीतने का दम लगाएंगे। टेककृति में लाखों रुपये का पुरस्कार दिया जाता है।

बेस्ट बिजनेस प्लान देने वालों को इनवेस्टमेंट का मौका मिलता है। इसके लिए सिडबी ने खास योजना बना रखी है। इस टेकफेस्ट का मीडिया पार्टनर अमर उजाला है।

नन्हे विज्ञानी ने दिखाए कमाल
आईआईटी के ओपेन स्कूल चैंपियनशिप के नन्हे विज्ञानियों ने रिसर्च प्रोजेक्ट बनाए और उनका प्रस्तुतीकरण किया। मोबाइल के ओवर रेडिएशन को वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी में कनवर्ट किया, फिर मोबाइल चार्ज करके दिखाया। एक विज्ञानी ने पानी में फैले फ्यूल को बीकर में डालकर आईआईटी के विज्ञानियों को अचंभित कर दिया।

इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जाए तो लाखों टन ऑयल आसानी से निकाला जा सकेगा। उन्हें समुद्र में जलाने या फिर प्रदूषण फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ज्यादातर विज्ञानियों के आदर्श सीवी रमन, आर्य भट्ट और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हैं। स्टूडेंट सम्यक शाह ने इंटरव्यू और सर्वे के जरिए ब्रेन ड्रेन रोकने का मंत्र दिया। अल्केश जैन ने भी फ्यूल का रिसर्च प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया।

ओवर रेडिएशन से वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी
सेंट अर्नोल्ड स्कूल विजय नगर इंदौर की छात्रा मानसी ने ओवर रेडिएशन एनर्जी को रेडियो वेब्ज में कनवर्ट किया, फिर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेज बनाया। इसके बाद इलेक्ट्रांस को वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी में तब्दील कर दिया।

इसकी मदद से मोबाइल चार्ज करके दिखाया। ओवर रेडिएशन से हीट एनर्जी विकसित करके मेडिकल की तमाम समस्याओं के समाधान का विकल्प दिया। 16 वर्षीय मानसी का प्रोजेक्ट रेडिएशन कास्ड बाई मोबाइल काजिंग इनवायमेंटल प्रॉब्लम पर था।

पानी से फ्यूल अलग किया
ओपेन स्कूल चैंपियनशिप के ए ग्रुप का खिताब जीतने वाले अथर्व चौकसे ने फिजिक्स के पासकल्स लॉ और पैराडाम्स का अप्लीकेशन बनाया, फिर बाल्टी भरे पानी में इंजन का फ्यूल डाला। इसके बाद फिजिक्स के वर्किंग मॉडल की मशीन को पानी में डालकर शोध का महत्व बताया।

चंद सेकेंड में ही फ्यूल एकत्रित हुआ और मोटर की मदद से बीकर में डाल दिया। एक प्रोजेक्ट के माध्यम से अथर्व ने बताया कि आयात-निर्यात के दौरान वर्ष 2006 में नौ लाख नौ हजार टन ऑयल समुद्री पानी में गिरकर बर्बाद हो गया।

वर्ष 2010 में 21 लाख गैलन ऑयल भी पानी में गिरा। यदि फिजिक्स के वर्किंग मॉडल और अप्लीकेशन की मदद ली जाए तो ऑयल को रिकवर किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट को आईआईटी के विज्ञानियों ने सराहा भी। अथर्व इंदौर के सिक्का स्कूल में कक्षा 10 के छात्र हैं।
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