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जब सिख समाज को भाजपा से रखा जाता था दूर, अटल ने पत्र का कुछ यूं दिया जवाब

Thu, 16 Aug 2018 06:58 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अटल बिहारी वाजपेयी को रविंदर सिंह भाटिया द्वारा भेजा गया पत्र
बात 1993 की है जब कानपुर में भाजपा के जिलाध्यक्ष सिखों को अपनी कार्यकारिणी में नहीं शामिल करते थे। सिखों को राजनीति से दूर रखा जा रहा था तब कानपुर के रविंदर सिंह भाटिया ने उन्हें पत्र लिखकर सिखों को भाजपा कार्यकारिणी में रखने की गुजारिश की थी। भाटिया के पत्र का जवाब अटल बिहारी वाजपेयी ने एक सप्ताह के अंदर ही उसका जवाब भेज दिया।

 
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर - फोटो : self
22 जनवरी 1993 को कानपुर के शास्त्री नगर इलाके में रहने वाले रविंदर सिंह भाटिया ने अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखकर यह बताया था कि सिखों को भाजपा कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया जा रहा है। उस दौर में अटल तत्कालीन लोक सेवा समिति के सभापति थे। अटल अपने पास आए हर पत्र का जवाब देते थे। इस पत्र का भी उन्होंने जवाब एक सप्ताह के अंदर भेज दिया। अटल ने लिखा - सिख भाईयों को बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना चाहिए। इसके लिए विशेष प्रयत्न आवश्यक हैं। कल दिल्ली में हस्ताक्षर अभियान में मुझे तिलक नगर जाने का अवसर मिला था जहां सिख भाईयों और बहनों ने बड़ी संख्या में हस्ताक्षर किए। गुरुनानक देव जी महाराज बाबर के अत्याचारों के बारे में जो कुछ कहा है वो आंखें खोलने वाला है। गुरु गोविंद सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के पुनर्निमाण के लिए जो संघर्ष किया वो भी इतिहास की धरोहर है। अब मैं ये कानपुर के कार्यकर्ताओं से कह रहा हूं वे आपस में संपर्क स्थापित करें और सिख समाज को भाजपा के साथ जोड़ने के प्रयत्न में लगें। 
 
 
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ वाजपेयी एक अच्छे कवि और संपादक भी थे। वाजपेयी ने लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को इनका जन्म हुआ। 
पुत्रप्राप्ति से हर्षित पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी को तब शायद ही अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका यह नन्हा बालक सारे देश और सारी दुनिया में नाम रोशन करेगा।वाजपेयी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहलाता है) और कानपुर (यूपी) के दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज (डीएवी) में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम. ए.की उपाधि प्राप्त की।

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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर - फोटो : amar ujala
सन 1993 मे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शन शास्त्र में पी.एच डी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए।वाजपेयी की पढ़ाई-लिखाई कानपुर में हुई। वह अपने कॉलेज के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे। 
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर वाजपेयी राजनीति में पूरी तरह से सक्रीय हो गए। राजनीति में उनका पहला कदम अगस्त 1942 में रखा गया, जब उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया। 
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
1951 में वाजपेयी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचे। 1957 से 1977 तक (जनता पार्टी की स्थापना तक) जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
1968 से 1973 तक वे भारतीय जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। 1977 में पहली बार वाजपेयी गैर कांग्रेसी विदेश मंत्री बने. मोरारजी देसाई की सरकार में वह 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे। 

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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर - फोटो : SELF
इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया। अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। 1980 में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की।

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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे. दो बार राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए। 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने। लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।
 
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे। अटल बिहारी वाजपेयी अब तक नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। वे सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी।
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